
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
चांद की एक झलक का इंतजार, सजी-धजी पूजा की थालियां और घर-आंगनों में गूंजती मंगलकामनाएं—करवा चौथ पर उदयपुर में आस्था, प्रेम और पारिवारिक स्नेह का सुंदर नजारा देखने को मिला।
दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम होते ही महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सोलह श्रृंगार किया। मेहंदी रचे हाथों, रंग-बिरंगी चुनरियों और दीपों की रोशनी से सजे घरों में पूजन की तैयारियां उत्साह के साथ की गईं। कई परिवारों में बेटियों और बुजुर्ग महिलाओं ने एक साथ पारंपरिक गीत गाए। सामूहिक पूजा में नई पीढ़ी की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने पर्व की रौनक और बढ़ा दी।
व्रत कथा सुनने के बाद महिलाओं ने करवा, रोली, अक्षत, जल और मिठाई से विधिवत पूजा-अर्चना की। चंद्रदर्शन होते ही छतों, आंगनों और खुले स्थानों पर उल्लास छा गया। महिलाओं ने छलनी से चांद का दर्शन कर अर्घ्य दिया और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला। इस परंपरा में धार्मिक आस्था के साथ दांपत्य प्रेम और आपसी विश्वास की झलक भी दिखाई दी।
पर्व के अवसर पर बाजारों में साड़ियों, आभूषणों, मेहंदी और पूजन सामग्री की खरीदारी को लेकर भी रौनक बनी रही। करवा चौथ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय पर्व केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिश्तों में प्रेम, विश्वास, परस्पर सम्मान और साथ निभाने के संकल्प को मजबूत करने का अवसर भी हैं।
रिपोर्ट एवं फोटो: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


