Tuesday, October 6, 2026

साइटिका: कमर से पैर तक होने वाले दर्द को समझें, कब जरूरी है चिकित्सकीय जांच

विशेष आलेख | शाबाश इंडिया।

साइटिका कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि सायटिक नर्व पर दबाव या जलन के कारण होने वाले दर्द और नसों से जुड़े लक्षणों का समूह है। सायटिक नर्व कमर के निचले हिस्से से निकलकर नितंब और पैर के पीछे की ओर जाती है। इसके लक्षण आमतौर पर एक पैर में दिखाई देते हैं और कई बार दर्द काफी तेज व परेशान करने वाला हो सकता है।

प्रमुख कारण

साइटिका का सबसे सामान्य कारण स्लिप डिस्क माना जाता है। इसके अलावा कमर की नसों के रास्ते में संकुचन, रीढ़ की हड्डी में होने वाले बदलाव, रीढ़ की चोट तथा उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ में आने वाले परिवर्तन भी इसके कारण हो सकते हैं।

साइटिका के प्रकार

साइटिका के लक्षणों की अवधि और प्रभावित हिस्से के आधार पर इसे अलग-अलग रूपों में समझा जा सकता है। एक्यूट साइटिका अचानक शुरू होकर कुछ सप्ताह तक रह सकता है, जबकि क्रोनिक साइटिका लंबे समय तक बना रह सकता है या बार-बार हो सकता है। जब लक्षण केवल एक पैर में हों तो इसे एकतरफा साइटिका और दोनों पैरों में लक्षण होने पर द्विपक्षीय साइटिका कहा जाता है। दोनों पैरों में लक्षण होने पर चिकित्सकीय मूल्यांकन विशेष रूप से जरूरी हो सकता है।

क्या होते हैं लक्षण?

साइटिका में कमर से नितंब और पैर तक जाने वाला तेज, चुभने या जलन जैसा दर्द हो सकता है। इसके साथ झनझनाहट, सुई चुभने जैसा एहसास, पैर या पैर की उंगलियों में सुन्नपन और पैर में कमजोरी महसूस हो सकती है। कई लोगों में खांसने, छींकने या कुछ गतिविधियों के दौरान दर्द बढ़ जाता है।

कैसे होती है जांच?

चिकित्सक पहले कमर और पैर की शारीरिक तथा न्यूरोलॉजिकल जांच करते हैं। इसमें मांसपेशियों की ताकत, संवेदना और रिफ्लेक्स की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर एमआरआई या सीटी स्कैन जैसी जांच कराई जा सकती है, खासकर जब लक्षण गंभीर हों, लगातार बने रहें या स्थिति जटिल होती दिखाई दे।

सिर्फ सामान्य कमर दर्द होने पर हर व्यक्ति को तुरंत एमआरआई की आवश्यकता नहीं होती। जांच और उपचार का निर्णय लक्षणों तथा चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर किया जाता है।

सावधानी और बचाव

लंबे समय तक लगातार एक ही स्थिति में बैठने से बचना चाहिए। हल्की और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखना सामान्यतः बेहतर होता है; बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना लाभकारी नहीं माना जाता। चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताए गए व्यायाम ही करें। भारी सामान उठाते समय सही तकनीक अपनाएं और अचानक वजन उठाने से बचें। बैठने और खड़े होने की मुद्रा सही रखें। धूम्रपान से बचना और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी रीढ़ के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

होम्योपैथिक उपचार के बारे में

होम्योपैथी में साइटिका के लिए विभिन्न औषधियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन किसी विशेष दवा या उसकी पोटेंसी को केवल साइटिका के नाम पर स्वयं लेना उचित नहीं है। उपचार योग्य एवं प्रशिक्षित होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

विशेष रूप से यदि साइटिका का कारण डिस्क का दबाव हो या नस में गंभीर कमजोरी दिखाई दे रही हो, तो सबसे पहले उचित चिकित्सकीय जांच जरूरी है। ऐसी स्थिति में उपचार का निर्णय कारण और लक्षणों की गंभीरता के अनुसार किया जाता है।

🚨 कब तुरंत चिकित्सा सहायता लें?

यदि साइटिका के साथ दोनों पैरों में गंभीर या बढ़ती हुई कमजोरी अथवा सुन्नपन हो, गुप्तांग या गुदा के आसपास सुन्नपन महसूस हो, पेशाब शुरू करने में परेशानी हो या पेशाब पर नियंत्रण न रहे, अथवा मल पर नियंत्रण समाप्त हो जाए, तो यह गंभीर नसों की समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में देरी न करते हुए तुरंत अस्पताल में चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना चाहिए।

— डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’
एम.ए., बी.एम.एस. (होम्योपैथिक), पीएच.डी.
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य, होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर

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