
विशेष आलेख | शाबाश इंडिया।
मास्टाइटिस स्तन के ऊतक में होने वाली सूजन है। यह स्तनपान कराने वाली महिलाओं में अधिक देखी जाती है, लेकिन स्तनपान न कराने वाली महिलाओं में भी संक्रमण, दूध की नलिकाओं से जुड़ी समस्या या अन्य कारणों से यह हो सकती है। स्तन में दर्द, लालिमा या गांठ जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
मास्टाइटिस के प्रमुख लक्षणों में स्तन में दर्द, भारीपन या संवेदनशीलता, किसी हिस्से में लालिमा और गर्माहट, सूजन या कठोर गांठ महसूस होना तथा छूने पर दर्द होना शामिल हैं। कुछ महिलाओं को बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, थकान और शरीर में दर्द भी हो सकता है। कभी-कभी निप्पल से असामान्य स्राव भी हो सकता है। संक्रमण बढ़ने पर स्तन में फोड़ा यानी मवाद से भरी थैली बन सकती है।
स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध का स्तन में अधिक समय तक जमा रहना, बच्चे का स्तन को ठीक से न पकड़ पाना, स्तनपान के बीच बहुत लंबा अंतर होना तथा दूध की नलिकाओं में रुकावट इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं। निप्पल में दरार या चोट होने पर बैक्टीरिया के प्रवेश से भी संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा स्तन पर चोट या लगातार दबाव पड़ने जैसी स्थितियां भी समस्या से जुड़ी हो सकती हैं।
मास्टाइटिस को सामान्य रूप से लैक्टेशनल और नॉन-लैक्टेशनल मास्टाइटिस के रूप में समझा जा सकता है। लैक्टेशनल मास्टाइटिस स्तनपान के दौरान होने वाला सामान्य प्रकार है, जबकि नॉन-लैक्टेशनल मास्टाइटिस स्तनपान न कराने वाली महिलाओं में हो सकता है। कुछ मामलों में सूजन के साथ संक्रमण हो जाता है और संक्रमण बढ़ने पर एब्सेस यानी मवाद से भरा फोड़ा बन सकता है।
अधिकांश मामलों में डॉक्टर लक्षणों और स्तन की शारीरिक जांच के आधार पर प्रारंभिक निदान कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर स्तन की सोनोग्राफी कराकर गांठ, सूजन या फोड़े की स्थिति देखी जा सकती है। कुछ विशेष परिस्थितियों में दूध या निप्पल से निकलने वाले स्राव की कल्चर जांच भी कराई जा सकती है। यदि गांठ बार-बार हो रही हो, बनी रहे या उसकी प्रकृति असामान्य लगे तो डॉक्टर आगे की जांच, आवश्यकतानुसार बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं।
स्तनपान कराने वाली महिला को मास्टाइटिस होने पर सामान्यतः बिना चिकित्सकीय सलाह के अचानक स्तनपान बंद नहीं करना चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार स्तनपान या दूध निकालना जारी रखना कई मामलों में मददगार हो सकता है। निप्पल में दरार या घाव होने पर उसकी उचित देखभाल करें। बहुत तंग ब्रा पहनने और स्तन पर लगातार दबाव पड़ने से बचें। पर्याप्त आराम और पानी का सेवन भी जरूरी है।
यदि तेज बुखार हो, लालिमा या सूजन तेजी से बढ़ रही हो, बहुत दर्दनाक गांठ महसूस हो या एक-दो दिन में सुधार न हो तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। स्तन में गांठ या संक्रमण जैसा लक्षण होने पर स्वयं दवा लेना उचित नहीं है।
होम्योपैथी में मास्टाइटिस के लक्षणों के आधार पर विभिन्न दवाओं का उल्लेख पारंपरिक साहित्य में मिलता है, जैसे बैलेडोना, ब्रायोनिया, फाइटोलक्का, कैल्केरिया फ्लोर और सिलिसिया। हालांकि, मास्टाइटिस, विशेषकर बैक्टीरियल संक्रमण या फोड़े की स्थिति में होम्योपैथी की प्रभावशीलता के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए आवश्यक चिकित्सा में देरी किए बिना योग्य चिकित्सक से जांच और उपचार लेना महत्वपूर्ण है। फोड़ा बनने पर चिकित्सकीय प्रक्रिया, जैसे ड्रेनेज या ड्रेसिंग, की आवश्यकता हो सकती है।
महत्वपूर्ण: स्तन में नई या लगातार बनी रहने वाली गांठ, त्वचा में असामान्य बदलाव, निप्पल में बदलाव या उपचार के बावजूद समस्या बने रहने पर केवल मास्टाइटिस मानकर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में स्तन कैंसर सहित अन्य संभावित कारणों को चिकित्सकीय जांच से अलग करना जरूरी है। डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार सोनोग्राफी, मैमोग्राफी या बायोप्सी जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।
— डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’, एम.ए., बी.एम.एस. (होम्योपैथिक), पीएच.डी.
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य, होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर


