
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के संकल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित दिवेर विजय महोत्सव-2026 के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में विविध आयोजन हो रहे हैं। नुक्कड़ नाटक, निबंध एवं रील मेकिंग प्रतियोगिताओं के साथ विशेष कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थी और युवा महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व, संघर्ष एवं राजधर्म को समझ रहे हैं।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ की ओर से आयोजित महोत्सव के तहत शुक्रवार को नुक्कड़ नाटक ‘दिवेर का रणघोष’ उदयपुर के आराध्य प्रथम पूज्य बोहरा गणेशजी को समर्पित किया गया। कलाकारों ने बोहरा गणेशजी के दर्शन के बाद तिराहे पर नाटक का मंचन किया। यह नाटक का दूसरा सार्वजनिक प्रदर्शन था।
मीरा गर्ल्स कॉलेज और विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज के विद्यार्थियों ने प्रभावी अभिनय और ओजपूर्ण संवादों के माध्यम से दिवेर विजय की ऐतिहासिक गाथा को जीवंत किया। महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, संघर्ष और स्वाधीनता के संकल्प को प्रस्तुत करते संवादों ने राहगीरों और दर्शकों को ठहरकर नाटक देखने के लिए आकर्षित किया। शनिवार को यह नुक्कड़ नाटक पिछोला झील की पाल स्थित दूधतलाई पार्क में शाम 5 से 6 बजे तक प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत आयोजित निबंध प्रतियोगिता को भी उत्साहजनक प्रतिसाद मिला है। 17 सितम्बर तक विद्यालय श्रेणी में करीब 600 और महाविद्यालय श्रेणी में 150 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। कुछ प्रतिभागियों ने राजस्थान से बाहर से भी अपनी प्रविष्टियां भेजी हैं।
महोत्सव संयोजक रमन सूद के अनुसार शनिवार से प्रताप गौरव केन्द्र परिसर में रील मेकिंग एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता की गतिविधियां शुरू होंगी। सुबह 10 से 12 बजे तक ‘रील्स वॉक’ आयोजित होगी। प्रतिभागियों को 19 और 20 सितम्बर को सुबह 10 से 12 बजे तथा शाम 5 से 7 बजे तक शूटिंग का अवसर मिलेगा।
प्रतियोगिता के विषयों में महाराणा प्रताप का शौर्य और स्वाभिमान, दिवेर विजय, चेतक और महाराणा प्रताप, संघर्ष और संकल्प, मेवाड़ की गौरवशाली संस्कृति, वीरभूमि मेवाड़, नई पीढ़ी और महाराणा प्रताप तथा ‘प्रताप के विचार और आज का युवा’ शामिल हैं।
महोत्सव के शैक्षणिक पक्ष के तहत 19 से 26 सितम्बर तक प्रताप गौरव केन्द्र परिसर में साहित्य संस्थान, राजस्थान विद्यापीठ के सहयोग से सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशालाएं आयोजित होंगी। इनमें ब्राह्मी, खरोष्ठी सहित प्राचीन एवं विकसित भारतीय लिपियों के अध्ययन और पठन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस बार फारसी भाषा एवं लिपि की कार्यशाला भी विशेष आकर्षण रहेगी। इसमें डॉ. चन्द्रशेखर, डॉ. शम्सुल हुदा शेरवाली और डॉ. सोलत अली प्रशिक्षण देंगे। आयोजकों के अनुसार भारतीय इतिहास, दस्तावेजों एवं अभिलेखों को समझने में फारसी भाषा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है, इसलिए इसे महोत्सव में विशेष रूप से शामिल किया गया है।
साहित्य संस्थान के निदेशक डॉ. कुलशेखर व्यास ने बताया कि प्रतिभागियों को अशोककालीन ब्राह्मी से लेकर सातवाहन, कुषाण, इक्ष्वाकु, गुप्त, बॉक्स-हेडेड ब्राह्मी, सिद्धमात्रिका, प्रोटो-बंगाली और शारदा लिपियों तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभिलेखों के छायाचित्रों एवं ई-प्रतिलिपियों पर अभ्यास के साथ क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान वास्तविक अभिलेखों के दस्तावेजीकरण की विधि भी समझाई जाएगी। कार्यशाला में डॉ. धर्मवीर शर्मा, डॉ. अभिजीत दांडेकर, डॉ. रवि शंकर, डॉ. सूरज राव और डॉ. राजेंद्र कुमार विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन देंगे।
रिपोर्ट: यौवंतराज माहेश्वरी


