Saturday, September 19, 2026

दुःख के आंसू नहीं, पश्चाताप के आंसू आने चाहिए : राष्ट्रसंत मुनि पुंगव सुधासागर जी

इंदौर | शाबाश इंडिया।

दलाल बाग मैदान, इंदौर में आयोजित अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर में देशभर से आए शिविरार्थी धार्मिक एवं जीवनोपयोगी संस्कार ग्रहण कर रहे हैं। राष्ट्रसंत, राजकीय अतिथि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आने वाले दुःख से घबराकर टूटना नहीं चाहिए, बल्कि आत्मचिंतन और पश्चाताप के माध्यम से अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुःख के आंसू नहीं, पश्चाताप के आंसू आने चाहिए, क्योंकि पश्चाताप व्यक्ति को भीतर से बदलने और दुःख के कारणों को दूर करने की दिशा दिखाता है।

मुनिश्री ने कहा कि आध्यात्मिक दशा प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को संकल्प के साथ आगे बढ़ना होता है। कार्य का सही ज्ञान होने पर ही उसके कारणों को समझकर सिद्धि की दिशा में बढ़ा जा सकता है। इसके लिए जीवन में अभाव की भावना में जीना छोड़कर संतोष की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु के जीवन में यह भाव सहज दिखाई देता है और हमें भी ऐसी ही सकारात्मक दृष्टि विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।

मुनिश्री ने कहा कि अपनी कमजोरियां और दुख हर किसी के सामने प्रकट नहीं करने चाहिए। उन्होंने समझाया कि यदि व्यक्ति बार-बार अपने दुख को दूसरों के सामने रखता है तो वह स्वयं को कमजोर महसूस करने लगता है। विशेषकर ऐसे लोगों के सामने अपनी कमियां या दुख नहीं बताने चाहिए, जो उन्हें दूर करने में सक्षम न हों या आपकी बात दूसरों तक पहुंचा दें। अपने दोषों को उसी के सामने रखना चाहिए, जो उन्हें दूर करने की क्षमता और मार्गदर्शन रखता हो।

उन्होंने कहा कि जैन दर्शन की दृष्टि से दुख का आना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना दुखी हो जाना। किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति के वियोग से मन विचलित हो सकता है, लेकिन उस स्थिति में भी आत्मबल बनाए रखना चाहिए। दूसरों की सहानुभूति को अपनी कमजोरी नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट पर संकट आने के बावजूद जो व्यक्ति अपने भीतर सुख और शांति का भाव बनाए रखता है, वह परिस्थितियों से ऊपर उठने की क्षमता विकसित करता है। साधु कष्ट सहते हुए भी स्वयं को सुखी मानता है और यही दृष्टि उसके जीवन में आंतरिक शांति का आधार बनती है।

मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने दोपहर की सभा में कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र की गुरुकुल परंपरा के अनुरूप यह श्रावक संस्कार शिविर आयोजित हो रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में औद्योगिक नगरी इंदौर में आयोजित 33वें अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर में देशभर से आए शिविरार्थियों को दैनिक जीवन को संस्कारवान बनाने का अवसर मिल रहा है। शिविर की कठोर दिनचर्या प्रातः 3:50 बजे से प्रारंभ होकर रात 8:30 बजे तक विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से चल रही है।

इससे पूर्व जगत कल्याण की भावना के साथ राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के श्रीमुख से महाशांतिधारा की गई। इसका सौभाग्य अमेरिका प्रवासी अनिरुद्ध जैन, संतोष सिंघई, रोहित सिंघई, राहुल सिंघई, विजय धुर्रा, अरुण जैन, सार्थक जैन, पारस गोल्डन सहित अन्य प्रमुख श्रद्धालुओं को मिला।

धर्मसभा में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया, ब्रह्मचारी विनोद भैया, चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन जी गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद जी गोधा, चक्रवर्ती मनीष जी गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक जी डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, मंत्री अक्षय कासलीवाल, धर्मेंद्र सिंकेम, रमेश चंद्र निर्वाणा, शिविर पुण्यार्जक आकाश जी कोयला, प्रिंसिपल जी टोंग्या, संजय जी पाटोदी, हुकुम काका कोटा, विजय जी धुर्रा, प्रचार प्रमुख संजय पाटौदी, सोनाली बागड़िया, अर्चना गोधा, सौरभ बड़जात्या, राहुल जी सेठी, भूपेंद्र जी भोपाली सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।

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