
जयपुर | शाबाश इंडिया।
जयपुर। जनकपुरी–ज्योति नगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में मंगलवार को मूलनायक भगवान 1008 श्री नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव परम पूज्य आचार्य श्री 108 आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
प्रातःकाल भगवान का जलाभिषेक एवं बीजाक्षर युक्त विश्व शांति कारक वृहद शांतिधारा का आयोजन किया गया। इसके पश्चात नित्य नियम पूजन, समंतभद्राचार्य विरचित अरिष्टनेमि स्तुति का पाठ तथा भगवान नेमिनाथ के 108 मंत्रों का जाप किया गया।
मूलनायक भगवान के अभिषेक का सौभाग्य मयंक पाटनी को तथा शांतिधारा का पुण्यार्जन विद्या देवी–विकास साखूनिया परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं विधिनायक भगवान की शांतिधारा का सौभाग्य पदम जैन बिलाला एवं बुद्धिप्रकाश छाबड़ा को मिला। श्रद्धालुओं ने निर्वाण कांड का वाचन कर भगवान नेमिनाथ को निर्वाण लाडू अर्पित किए। गुंबद में विराजित भगवान नेमिनाथ की खड्गासन प्रतिमा पर भी निर्वाण लाडू चढ़ाए गए। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य महावीर प्रसाद–कांता देवी पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ।
अपने प्रवचन में आचार्य श्री आदित्यसागर जी महाराज ने भगवान नेमिनाथ के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे राजा उग्रसेन की पुत्री राजुलमती से विवाह के लिए पहुंचे और बारातियों के भोजन हेतु पशुओं को वध के लिए बंधा देखा, तो उनके हृदय में करुणा का सागर उमड़ पड़ा। उसी क्षण उन्होंने विवाह का त्याग कर वैराग्य धारण किया और तपस्या के मार्ग पर अग्रसर हो गए। लगभग 70 वर्षों की कठोर साधना के उपरांत आषाढ़ शुक्ल अष्टमी के दिन भगवान नेमिनाथ ने एक हजार साधुओं के साथ गिरनार पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया।
धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि भगवान नेमिनाथ का जीवन करुणा, अहिंसा, त्याग और वैराग्य का अनुपम संदेश देता है। उनके आदर्श आज भी मानवता को दया, संवेदना और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव को श्रद्धापूर्वक मनाया।


