
गंगासागर | शाबाश इंडिया।
गंगासागर। पश्चिम बंगाल के गंगासागर में जैन समाज के लिए ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। श्री दिगंबर जैन गंगासागर पार्श्वनाथ तीर्थ विकास समिति एवं श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा (पश्चिम बंगाल) के संयुक्त तत्वावधान में मात्र सात दिनों में भव्य जैन चैत्यालय (मंदिर) का निर्माण कर भगवान की वेदी प्रतिष्ठा संपन्न की गई।
यह आयोजन परम पूज्य आचार्य 108 श्री वसुनंदीजी महाराज ससंघ के शुभाशीर्वाद एवं पंडित आलोक कुमार जैन शास्त्री (बड़ामलहरा) के कुशल निर्देशन में 18 एवं 19 जुलाई को सम्पन्न हुआ।
समिति के अनुसार, कुछ समय पूर्व पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियों के दौरान आचार्य श्री वसुनंदीजी महाराज ने निर्देश दिया था कि गंगासागर में सर्वप्रथम एक चैत्यालय का निर्माण कर भगवान की प्रतिमाएं विराजमान की जाएं तथा नियमित पूजन-अर्चना के लिए पुजारी की व्यवस्था की जाए। आचार्य श्री के इस मार्गदर्शन के बाद घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा और अल्प समय में चैत्यालय निर्माण का कार्य पूरा हो गया।
प्रतिमाओं की व्यवस्था भी अत्यंत सहज रूप से हुई। आर्यिका गणिनी पूज्य ज्ञानमती माताजी द्वारा अयोध्या में प्रतिष्ठित तीन प्रतिमाएं शिखरजी से कोलकाता लाई गईं। इसके बाद बेलगाछिया दिगंबर जैन मंदिर में तीन दिनों तक अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। तत्पश्चात प्रतिमाओं को गंगासागर पहुंचाकर विधि-विधान से वेदी प्रतिष्ठा सम्पन्न कराई गई।
इस ऐतिहासिक आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से अनेक श्रद्धालु एवं पुण्यार्जक परिवारों ने वेदी, प्रतिमाएं, ध्वज, पूजन सामग्री, अष्टमंगल, अष्टप्रातिहार्य, महाघंटा तथा अन्य धार्मिक सामग्री अर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा (पश्चिम बंगाल) ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी पुण्यार्जकों, समाजसेवियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे जैन धर्म, संस्कृति एवं जिनशासन की गौरवपूर्ण पुनर्स्थापना की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
राष्ट्रीय महामंत्री राजकुमार जैन सेठी ने कहा कि गंगासागर में अल्प समय में चैत्यालय निर्माण एवं वेदी प्रतिष्ठा का यह आयोजन समाज की एकजुटता, गुरु-कृपा और धार्मिक समर्पण का अनुपम उदाहरण है।


