Saturday, July 11, 2026

मर्यादा ही जीवन का वास्तविक आधार, यही दिलाती है सम्मान, विश्वास और सफलता : आचार्य सुंदर सागर महाराज

फागी | शाबाश इंडिया

फागी कस्बे के पार्श्वनाथ चैत्यालय में विराजमान आचार्य श्री 108 सुंदर सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। चतुर्विध संघ की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने ज्ञानामृत का लाभ उठाया तथा धर्ममय वातावरण में पूजा-अर्चना कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

राजस्थान जैन महासभा, फागी शाखा के महामंत्री राजाबाबू गोधा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टद्रव्यों से पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने विभिन्न तीर्थंकरों एवं आचार्यों की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज ने कहा कि मर्यादा ही जीवन का वास्तविक आधार है। मर्यादा का पालन करने वाला व्यक्ति समाज में सम्मान, विश्वास और सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सदैव अपनी मर्यादा में रहकर जीवन जीना चाहिए, क्योंकि मर्यादा ही श्रेष्ठ मानव का गुण है।

आचार्य श्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि माता सीता द्वारा मर्यादा रेखा का उल्लंघन करने के बाद उन्हें रावण द्वारा अशोक वाटिका ले जाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि मर्यादा का पालन जीवन में कितना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का प्रत्येक नियम मर्यादा से बंधा हुआ है और जहां मर्यादा का उल्लंघन होता है, वहां संकट उत्पन्न हो जाता है।

उन्होंने कहा कि परिवार में भी यदि पिता-पुत्र, पति-पत्नी, सास-बहू और भाई-भाई के बीच मर्यादा एवं सम्मान का भाव नहीं रहेगा तो वैमनस्य बढ़ेगा और परिवार टूटने की स्थिति पैदा हो जाएगी। मर्यादा का अर्थ है कि व्यक्ति अपने विचार, व्यवहार और कर्म को सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों की सीमा में रखकर जीवन व्यतीत करे। ऐसा करने से जीवन संतुलित, सार्थक और सफल बनता है।

आचार्य श्री ने जैन धर्म के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैनत्व का लक्ष्य आत्मा को कर्मों के बंधन से मुक्त कर केवलज्ञान की प्राप्ति कराना है। इसके लिए अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचाना ही सच्चे धर्म का मार्ग है।

उन्होंने सच्चे गुरु के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि साधु-संत मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। उनके सान्निध्य से मन को शांति, धैर्य और सही निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त होती है। सच्चा गुरु वही है जो निस्वार्थ भाव से अपने शिष्यों के आध्यात्मिक कल्याण और मोक्ष की चिंता करता है।

मंदिर समिति के मंत्री कमलेश चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों ने सामूहिक रूप से श्रीफल अर्पित कर विभिन्न तीर्थंकरों एवं आचार्यों की पूजा-अर्चना की तथा आचार्य श्री को जिनवाणी भेंट कर उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर फूलचंद गिंदोड़ी, मोहनलाल चौधरी, सोहन झंडा, रामस्वरूप मोदी, महावीर अजमेरा, ओमप्रकाश डेठानी, नरेंद्र कासलीवाल, रमेश चौधरी, पूर्व प्रधान सुकुमार झंडा, महावीर बावड़ी, अनिल कठमाना, सुरेंद्र बावड़ी, सत्येंद्र बावड़ी, विनोद झंडा, लेखराज गिंदोड़ी, दीपक कलवाड़ा, नितेश कासलीवाल, पवन मोदी, विनोद मोदी, दीपक मोदी, निखिल लावा, कमलेश चौधरी एवं राजाबाबू गोधा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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