
विशेष आलेख | शाबाश इंडिया।
डॉ. संध्या यादव
(वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ)
दीपोत्सव का पावन पर्व अपने साथ उल्लास और उमंग की नई रोशनी लेकर आता है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी का यह दिन केवल सोना-चांदी और अन्य वस्तुओं की खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में आरोग्य, संयम और सकारात्मकता का संकल्प लेने का भी शुभ अवसर है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद इसी दिन आयुर्वेद के अधिष्ठाता भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन को धन्वन्तरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। भगवान धन्वन्तरि का प्राकट्य हमें जीवन के उस शाश्वत सत्य की याद दिलाता है कि ‘पहला सुख निरोगी काया।’
एक चिकित्सक के रूप में मेरा अनुभव है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ ने हमारी दिनचर्या और जीवनशैली को काफी प्रभावित किया है। विशेष रूप से महिला का स्वस्थ होना पूरे परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए महत्वपूर्ण है। एक स्वस्थ नारी ही परिवार को ऊर्जा, सकारात्मकता और बेहतर जीवन की दिशा दे सकती है।
धनतेरस का वास्तविक संदेश यही है कि समृद्धि का आनंद तभी सार्थक है, जब हमारा शरीर स्वस्थ हो। आयुर्वेद के सिद्धांतों, योग, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या को अपनाकर हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
इस धनतेरस आइए, सोने-चांदी और आभूषणों की खरीदारी के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य और सद्विचारों को भी अपने जीवन की पूंजी बनाएं। याद रखिए, निरोगी शरीर ही जीवन का सबसे अनमोल धन है।
भगवान धन्वन्तरि से प्रार्थना है कि वे प्रत्येक परिवार को उत्तम स्वास्थ्य, सुख-शांति और अनंत समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।


