
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
इतिहास केवल किताबों के पन्नों में ही नहीं, बल्कि सदियों पुराने स्मारकों, कलात्मक स्तंभों, गुम्बदों और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी में भी जीवंत रहता है। इसी ऐतिहासिक विरासत को अपनी संवेदनशील दृष्टि से कैमरे में उतारा है गुजरात के भावनगर की युवा फोटोग्राफर क्रिष्नाबा परमार ने।
गुजरात राज्य ललित कला अकादमी के सहयोग से उनकी तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी ‘उदयपुर हेरिटेज स्ट्रक्चर’ का शुभारंभ ऐतिहासिक बागोर की हवेली में हुआ। उद्घाटन समारोह में हेमंत मेहता, प्रसिद्ध संगीतकार धनराज दधीच एवं उनके साथी संगीतकार तथा डॉ. अजयसिंह जाडेजा उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
आहड़ की छतरियों के स्थापत्य सौंदर्य ने खींचा ध्यान
प्रदर्शनी में उदयपुर की ऐतिहासिक धरोहरों, विशेष रूप से आहड़ की प्रसिद्ध छतरियों के स्थापत्य सौंदर्य को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पत्थरों पर उकेरी गई बारीक आकृतियां, कलात्मक स्तंभ, आकर्षक गुम्बद और विविध स्थापत्य संरचनाएं दर्शकों को अतीत की शिल्पकला से रूबरू कराती हैं।
प्रकाश और छाया के संयोजन से उभरी कलात्मकता
क्रिष्नाबा की तस्वीरों में प्रकाश, छाया, कैमरा एंगल और फ्रेमिंग का सुंदर संयोजन देखने को मिलता है। उन्होंने ऐतिहासिक इमारतों को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि उनकी कलात्मक और सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। तस्वीरें अतीत के शिल्पकारों की अद्भुत सृजनशीलता को भी सामने लाती हैं।
विरासत संरक्षण का संदेश देती प्रदर्शनी
गुजरात की युवा प्रतिभा द्वारा राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों को फोटोग्राफी का विषय बनाना दोनों राज्यों की कला और संस्कृति के बीच एक रचनात्मक सेतु का काम कर रहा है। प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि ऐतिहासिक विरासत किसी एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि हमारी साझा सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है।
यह प्रदर्शनी 3 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। कला और इतिहास प्रेमियों के लिए यह तस्वीरों के माध्यम से मेवाड़ के गौरवशाली अतीत को करीब से देखने का विशेष अवसर है।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


