
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
गुजरात की छायाकार रक्षाबा जाडेजा की तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी ‘उदयपुर बियॉन्ड द पैलेस’ का शुभारंभ
झीलों के शहर उदयपुर की पहचान भव्य महलों, ऐतिहासिक इमारतों और प्राकृतिक सौंदर्य से कहीं आगे तक फैली हुई है। यहां की गलियों, विरासत के अनमोल प्रतीकों और बदलते शहरी दृश्यों में अनेक ऐसी कहानियां छिपी हैं, जिन्हें कैमरे की नजर बेहद खूबसूरती से बयां करती है। उदयपुर के इसी बहुआयामी सौंदर्य को गुजरात की छायाकार रक्षाबा जाडेजा ने अपने कैमरे में कैद कर एक अलग अंदाज में प्रस्तुत किया है। उनकी तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी ‘उदयपुर बियॉन्ड द पैलेस’ का गुरुवार को ऐतिहासिक बागोर की हवेली में शुभारंभ हुआ।
गुजरात ललित कला अकादमी के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन पीपलिया स्टेट के चंद्रभानुसिंह शेखावत ने किया। इस अवसर पर रागिनी साहेबा राठौड़, हेमंत मेहता, डॉ. राकेश शर्मा ‘राजदीप’, योगाचार्य सुरेश पालीवाल और डॉ. अजयसिंह जाडेजा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
महलों की चकाचौंध से अलग शहर का अनदेखा चेहरा
प्रदर्शनी की सबसे खास बात इसकी विषयवस्तु और प्रस्तुति है। ‘उदयपुर बियॉन्ड द पैलेस’ यानी महलों से परे उदयपुर की अवधारणा शहर को देखने का एक नया नजरिया प्रस्तुत करती है। रक्षाबा जाडेजा ने अपने छायाचित्रों के माध्यम से उदयपुर के स्थापत्य सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक छटाओं और विविध शहरी दृश्यों को कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया है।
इन तस्वीरों के जरिए दर्शकों को उस उदयपुर से रूबरू कराने का प्रयास किया गया है, जिसकी खूबसूरती केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। शहर की सांस्कृतिक पहचान और उसके परिवेश में बिखरे सौंदर्य को कैमरे की संवेदनशील दृष्टि से सामने लाना प्रदर्शनी का प्रमुख उद्देश्य है।
तस्वीरों में समाई शहर की सांस्कृतिक स्मृतियां
फोटोग्राफी की विशेषता है कि वह समय के किसी खास पल को स्थायी स्मृति में बदल देती है। ऐतिहासिक इमारतों का स्थापत्य हो या शहर के परिवेश में छिपी खूबसूरत अनुभूतियां, एक संवेदनशील छायाकार अपनी दृष्टि और कैमरे के फ्रेम से सामान्य दृश्यों को भी खास बना देता है।
रक्षाबा जाडेजा की यह प्रदर्शनी इसी कलात्मक सोच के साथ उदयपुर की विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को छायाचित्रों के माध्यम से व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास है। साथ ही यह आयोजन फोटोग्राफी को कलात्मक अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम के रूप में भी रेखांकित करता है।
29 से 31 अक्टूबर तक देख सकेंगे दर्शक
बागोर की हवेली में आयोजित यह छायाचित्र प्रदर्शनी 29 से 31 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक दर्शकों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी। कला, फोटोग्राफी, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वालों के लिए यह प्रदर्शनी उदयपुर को एक नए नजरिए से जानने और देखने का अनूठा अवसर है।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


