
जयपुर | शाबाश इंडिया।
21 अक्टूबर शहीद दिवस विशेष आलेख
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।”
रामप्रसाद बिस्मिल की ये पंक्तियाँ हमें देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों के बलिदान की याद दिलाती हैं। इन वीर सपूतों पर जितना गर्व किया जाए, कम है। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति इसलिए दी, ताकि देशवासी सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन जी सकें। लेकिन विडंबना है कि जयपुर में शहीदों की स्मृतियों को संजोने वाले कुछ स्मारक आज उपेक्षा का शिकार हैं।
एमआई रोड का शहीद स्मारक बदहाली का शिकार
जयपुर के एमआई रोड पर प्रमुख स्थान पर बना शहीद स्मारक इसकी मिसाल है। यह स्मारक असामाजिक तत्वों और भिखारियों की गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। परिसर के भीतर सफाई दिखाई देती है, लेकिन इसके सामने अक्सर कचरे का ढेर लगा रहता है। शहर के अनेक महत्वपूर्ण कार्यालयों के निकट स्थित यह स्मारक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है, बशर्ते संबंधित विभाग इसकी देखरेख और प्रचार-प्रसार पर ध्यान दें।
यह स्मारक वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में राजस्थान के शहीद हुए जवानों की स्मृति से जुड़ा है। इसकी शिलापट्टिका पर लगभग 400 शहीद जवानों के नाम अंकित हैं। राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल सरदार जोगेन्द्र सिंह ने 26 जनवरी 1974 को इसका शिलान्यास किया था। निर्माण पूरा होने पर 12 अक्टूबर 1976 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति बी.डी. जत्ती ने इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल सरदार जोगेन्द्र सिंह और मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी भी उपस्थित थे।
पुलिस शहीद स्मारक: कर्तव्य और बलिदान का प्रतीक
जवाहरलाल नेहरू मार्ग और गोविंद मार्ग के बीच स्थित पुलिस शहीद स्मारक भी जयपुर की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। दुर्भाग्य से अनेक लोग इसे इसके वास्तविक नाम के बजाय ‘तीन मूर्ति सर्किल’ के नाम से जानते हैं।
यह स्मारक किसी एक घटना में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की याद में नहीं, बल्कि पूरे पुलिस विभाग के उन कर्मवीरों को समर्पित है, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इनमें तस्करों और डाकुओं से मुठभेड़ तथा विभिन्न अभियानों के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
वर्ष 1959 में लद्दाख के दुर्गम क्षेत्र में मातृभूमि की रक्षा करते हुए भारतीय पुलिस के एक छोटे दल के जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इसी बलिदान ने पुलिस शहीद स्मारक के निर्माण की प्रेरणा दी। पूरे पुलिस विभाग को समर्पित ऐसा स्मारक अपने आप में विशेष महत्व रखता है।
स्मारक में एक पुलिस अधिकारी और दो पुलिसकर्मियों की प्रतिमाएँ स्थापित हैं। एक सिपाही शस्त्र उल्टा कर खड़ा है और शहीदों को सलामी दे रहा है, जबकि एक अन्य सिपाही और अधिकारी एक-दूसरे का हाथ थामे अंतिम साँसें लेते हुए दिखाई देते हैं। इन प्रतिमाओं का निर्माण स्वर्गीय श्रीमती उषा रानी हूजा ने किया था।
वर्ष 1962 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के शासनकाल में स्मारक के निर्माण की शुरुआत हुई। प्रतिमाएँ एक वर्ष में तैयार हुईं और वर्ष 1963 में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनका अनावरण किया। सीमेंट से बनी इन प्रतिमाओं पर धातु की परत चढ़ाई गई है। खड़े सिपाही की प्रतिमा नौ फीट ऊँची है।
हर वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। यह अवसर पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करने और पुलिस विभाग का गौरव तथा मनोबल बढ़ाने का प्रतीक है।
अमर जवान ज्योति: वीर सपूतों को समर्पित भव्य स्मारक
सवाई मानसिंह स्टेडियम के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने स्थित अमर जवान ज्योति स्मारक भी देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति को समर्पित है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 16 अगस्त 2005 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया था।
जयपुर विकास प्राधिकरण ने निर्धारित 165 दिनों में इसका निर्माण पूरा किया। लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्मारक में करीब एक हजार टन जोधपुरी पत्थर का उपयोग किया गया। इसकी 42 फीट ऊँची छतरी में विद्युत ज्योति स्थापित है और दोनों ओर 70-70 फीट ऊँचे स्तंभ हैं। स्मारक की पट्टिकाओं पर तीनों सेनाओं में शहीद हुए राजस्थान के 1,902 वीर सपूतों के नाम अंकित हैं।
यहाँ प्रतिदिन शाम सात और आठ बजे लाइट एंड साउंड कार्यक्रम आयोजित किए जाने की व्यवस्था थी। लेखक के अनुसार, तकनीकी संयंत्र खराब होने के कारण अब केवल ध्वनि प्रसारित हो रही है। स्मारक की देखरेख की जिम्मेदारी सैनिक कल्याण बोर्ड के पास है।
शाम होते ही यहाँ जयपुरवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों की अच्छी-खासी संख्या जुटती है। स्मारक पर पहुँचकर शहीदों के सम्मान में हर व्यक्ति का सिर श्रद्धा से झुक जाता है।
शहीद स्मारकों का संरक्षण और प्रचार-प्रसार जरूरी
जयपुर के ये स्मारक केवल पत्थर, प्रतिमाओं और शिलालेखों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की अमूल्य विरासत हैं। आवश्यकता है कि इनकी नियमित सफाई, उचित रखरखाव और प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि जयपुर आने वाला प्रत्येक पर्यटक इनके ऐतिहासिक महत्व से परिचित हो सके।
शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि केवल पुष्प अर्पित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनकी स्मृतियों को सम्मान देना, स्मारकों को स्वच्छ रखना और नई पीढ़ी को उनके बलिदान से परिचित कराना भी हमारा दायित्व है।
शहीद दिवस पर देश के सभी वीर शहीदों को सादर नमन।
लेखक: हीरा चन्द बैद
बी-175, नन्द किशोर पारीक मार्ग, बापू नगर, जयपुर
मोबाइल: 98281 64556


