Wednesday, October 21, 2026

भगवान महावीर के गुणगान से गूंजा कवि सम्मेलन, देर रात तक चला हास्य और काव्य का दौर

Oplus_131072

श्री महावीरजी | शाबाश इंडिया।

श्री महावीरजी। श्री दिगंबर जैन पदयात्रा संघ जयपुर के तत्वावधान में आयोजित जयपुर से श्री महावीरजी की 40वीं पदयात्रा के श्री महावीरजी पहुंचने पर रात्रि में भगवान महावीर के मुख्य मंदिर के कटला परिसर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। देशभर से आए प्रसिद्ध कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन चरित्र, अहिंसा, दया, क्षमा और त्याग के संदेशों का गुणगान किया। कार्यक्रम में पदयात्रियों, देशभर से आए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

पदयात्रा संघ के प्रचार प्रभारी विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि कवि सम्मेलन का शुभारंभ भगवान महावीर के चित्र के समक्ष समाजश्रेष्ठी बाबूलाल पाटनी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संघ के संरक्षक सुभाष चंद जैन, संयोजक महेश चंद जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का तिलक, माला और दुपट्टा पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया। पूर्व संयोजक विनेश सोगानी ने मंच संचालन किया और कवि सम्मेलन की सूत्रधार नीमच की कवयित्री डॉ. प्रेरणा ठाकरे को काव्यपाठ का शुभारंभ करने के लिए आमंत्रित किया।

सरस्वती वंदना एवं मंगलाचरण के बाद झालावाड़ से आए हास्य कवि राजेश लोटपोट ने संस्कृति संरक्षण पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, “हमारी संस्कृति इस तरह भी पोषित होनी चाहिए, हनुमान अंश राष्ट्रीय फिल्म घोषित होनी चाहिए।” उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।

ब्यावरा से आए मनीष गोस्वामी ने भगवान महावीर की महिमा का गुणगान करते हुए अपनी कविता में कहा—

“जिनकी छुअन से ये धरा भी महकती है,
ऐसे महामुनि के शरीर को प्रणाम है।

बड़े-बड़े ज्ञानवान जिनके चरण चूमें,
हाथ जोड़कर ऐसे धीर को प्रणाम है।

किसी के मिटाने से भी मिटती नहीं है कभी,
खींची ऐसी धर्म की लकीर को प्रणाम है।

दया, क्षमा, त्याग सारे जग को सिखाने वाले,
पावन-पुनीत महावीर को प्रणाम है।”

कोटा से आए हास्य कवि गिरिराज आमेटा ने “हे महावीर भगवान, हमें दो ऐसा वरदान, सारे धर्म रहें मिलजुल, खुशहाल हो हिंदुस्तान” की प्रस्तुति देकर देश में सद्भाव और खुशहाली की कामना की।

कवि सम्मेलन की सूत्रधार डॉ. प्रेरणा ठाकरे ने “रघुकुल की मर्यादा हूं मैं, अवधपुरी का पानी हूं, केवल सरयू जल मत समझो, मैं पूरी राम कहानी हूं” पंक्तियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों और मर्यादा के संदेश को प्रस्तुत किया।

इंदौर से आए हास्य कवि अतुल ज्वाला ने अपनी रचना के जरिए जीवन में हंसी और प्रसन्नता का महत्व समझाया—

“गम, आंसू, खामोशी को शर्मिंदा रखने के लिए,
कुछ जगह रखी है हंसी का परिंदा रखने के लिए।
उदासी मत सजाइए चेहरे के गुलदान में,
हंसी बहुत जरूरी है खुद को जिंदा रखने के लिए।”

कवियों की प्रस्तुतियों पर पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। देर रात तक चले कवि सम्मेलन के दूसरे दौर में हास्य, राजनीति, देश की ज्वलंत समस्याओं, फिल्मों, बॉलीवुड, पुलिस-प्रशासन और राजनेताओं पर व्यंग्यात्मक कविताओं की प्रस्तुतियां हुईं। कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और माहौल को उत्साहपूर्ण बनाए रखा।

अंत में संघ के संरक्षक सुभाष चंद जैन ने सभी कवियों, अतिथियों और उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar