
इंदौर | शाबाश इंडिया।
इंदौर के दलाल बाग मैदान में आयोजित स्नातक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति और कर्तव्यबोध का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “काम तुम करोगे और मान भारत माता का बढ़ेगा, तब भारत भूमि तुम पर गर्वित होगी।” सम्मेलन के समापन पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी तथा श्रेष्ठ स्नातकों को श्रमण संस्कृति रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
भारत माता के ऋण को चुकाना हमारा कर्तव्य
मुनि श्री ने कहा कि भारत जैसे राष्ट्र, श्रेष्ठ कुल, गुरु, प्रभु और संस्कृति का मिलना हमारा सौभाग्य है। जब भी व्यक्ति इसे अपना सौभाग्य मानता है, उसी क्षण वह राष्ट्र के प्रति ऋणी हो जाता है। इस उपकार का ऋण चुकाना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि दूसरे ऋण लेकर जीवन समाप्त हो जाए तो अलग बात है, लेकिन भारत माता का ऋण चुकाए बिना जीवन की सार्थकता अधूरी है। हमें ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनसे भारतीय संस्कृति, समाज और राष्ट्र का गौरव बढ़े।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति के आचरण और खान-पान की मर्यादा से भी उसकी जैन एवं भारतीय संस्कृति की पहचान बनती है। हमारा व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि उससे संस्कृति के संस्कार और गौरव झलकें।
मुनि श्री के विशाल चित्र का हुआ लोकार्पण
सम्मेलन से पहले परम पूज्य निर्यापक श्रमण, तीर्थ चक्रवर्ती मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के विशाल चित्र का अनावरण किया गया। इस अवसर पर बालाघाट के डीआईजी विनित जैन, पूर्व डीजीपी शांत कुमार, पुण्यार्जक परिवार से मुकेश कुमार एवं विजय कुमार पाटौदी, मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा, अशोक नगर अधिवेशन संयोजक संजय समारिया, महामंत्री हर्ष जैन, गिरीश जैन ‘गिन्नी’ और अभिषेक जैन सहित अनेक प्रमुखजन उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि देशभर से आए युवा विद्वान शिविरों के माध्यम से जनजागृति लाने और भारतीय संस्कृति के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगले दिन सभी स्नातक विद्वानों को विद्वत रत्न की उपाधि से अलंकृत किया जाएगा।
कार्यक्रम में चक्रवर्ती सपना मनीष गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद नवीन गौधा, चातुर्मास अध्यक्ष अशोक जोशी, महामंत्री हर्ष जैन, मंत्री अक्षय कासलीवाल, कोषाध्यक्ष आकाश कोयला, सह कोषाध्यक्ष सौरव बड़जात्या, संजय समारिया, गिरीश ‘गिन्नी’, धर्मेंद्र सिमकेम, राहुल जैन और संजय पाटौदी सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।
युवा विद्वानों का सम्मान कर जैन समाज अभिभूत
प्राचार्य किरण प्रकाशजी ने देशभर से आए युवा विद्वानों का स्वागत करते हुए कहा कि जैन समाज उनके आगमन और सम्मान से अभिभूत है। ये विद्वान श्रेष्ठ वक्ता होने के साथ भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों के उत्थान के लिए भी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह वह पावन भूमि है, जहां भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और तीर्थंकर भगवान महावीर ने जन्म लेकर अपने आदर्शों से समाज को दिशा दी। ऐसी गौरवशाली भूमि पर जन्म लेना सौभाग्य है और इसके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
सम्मेलन में राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और समाज के प्रति दायित्व निभाने का संदेश दिया गया। समापन अवसर पर सम्मानित युवा विद्वानों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।


