
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, खनकती डांडिया की छड़ियाँ, गुजराती लोकगीतों की मधुर धुनें और हर चेहरे पर छलकता उल्लास। कहीं युवा कदमों से कदम मिलाकर गरबा करते नजर आए, तो कहीं रंगीन चुनरियों और पारंपरिक वेशभूषा ने उत्सव की रौनक बढ़ाई। संगीत की हर नई धुन के साथ उत्साह बढ़ता गया और देखते ही देखते पूरा परिसर गुजराती लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठा। बुधवार शाम चित्रकूट नगर स्थित पेसिफिक कॉलेज में आयोजित डांडिया-गरबा महोत्सव में परंपरा और युवा उमंग का खूबसूरत संगम देखने को मिला।
मां अम्बे की आराधना से हुआ उत्सव का शुभारंभ
महोत्सव का शुभारंभ मां अम्बे की आरती के साथ हुआ। श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण वातावरण में प्रतिभागियों ने देवी की आराधना कर सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। इसके बाद जैसे ही पारंपरिक गुजराती गीतों की स्वर लहरियाँ गूँजीं, डांडिया की खनक और थिरकते कदमों ने पूरे माहौल को उत्सवी रंग में रंग दिया। कुछ ही देर में कॉलेज परिसर एक खूबसूरत गरबा प्रांगण में तब्दील हो गया।
पारंपरिक परिधानों में नजर आई गुजराती लोक संस्कृति की छटा
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण प्रतिभागियों की पारंपरिक वेशभूषा रही। रंग-बिरंगे चनिया-चोली, लहराते दुपट्टे, आकर्षक आभूषण और केडिया-कुर्ते जैसे पारंपरिक परिधानों ने आयोजन की खूबसूरती में चार चाँद लगा दिए। लोकगीतों की लय पर गोल घेरा बनाकर सामूहिक गरबा करते प्रतिभागियों के कदमों का तालमेल देखते ही बनता था।
डांडिया की छड़ियों की मधुर खनक और संगीत की तेज होती लय के बीच प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भाव-भंगिमाओं ने शाम को और भी यादगार बना दिया।
कॉलेज से शहरवासियों तक पहुँचा उत्सव का उत्साह
आयोजन की खासियत यह रही कि इसमें केवल कॉलेज के विद्यार्थियों और फैकल्टी ने ही नहीं, बल्कि गूगल फॉर्म के माध्यम से पूर्व पंजीकरण कराने वाले शहरवासियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस तरह कॉलेज परिसर विद्यार्थियों, शिक्षकों और शहरवासियों के बीच सांस्कृतिक मेल-मिलाप का खूबसूरत मंच बन गया।
यहाँ न उम्र का बंधन दिखाई दिया और न औपचारिकता की दीवार। हर कोई संगीत की धुनों पर अपनी खुशियाँ साझा करता नजर आया।
हर राउंड के साथ बढ़ता गया जोश
महोत्सव में गरबा और डांडिया के कई राउंड आयोजित किए गए। प्रत्येक राउंड के साथ प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ता गया। कहीं पारंपरिक गरबा की सधी हुई ताल पर कदम थिरके, तो कहीं डांडिया की तेज लय पर युवाओं ने अपनी नृत्य प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
गीत और नृत्य के अंदाज बदलते रहे, लेकिन प्रतिभागियों के चेहरों पर मुस्कान और उत्साह बरकरार रहा। पूरे आयोजन में सामूहिक आनंद और सांस्कृतिक आत्मीयता का माहौल बना रहा।
डांडिया की थिरकन के बीच कैनवास पर उतरे उल्लास के रंग
डांडिया-गरबा महोत्सव में VIFT कॉलेज के फाइन आर्ट्स फैकल्टी एवं कलाकार राजेश यादव ने लाइव पेंटिंग डेमो के माध्यम से आयोजन में कला का अनूठा रंग जोड़ा। संगीत की लय और प्रतिभागियों के उल्लास के बीच उन्होंने अपनी तूलिका से कैनवास पर रचनात्मक अभिव्यक्ति को साकार किया।
गरबा की सांस्कृतिक रंगत के बीच चित्रकला के इस अभिनव प्रयोग ने आयोजन को अलग पहचान दी। नृत्य, संगीत और चित्रकला का यह संगम महोत्सव का विशेष आकर्षण रहा।
यश सोनी और पूजा बने बेस्ट डांसर
उत्सव के समापन पर उत्कृष्ट नृत्य प्रदर्शन के लिए यश सोनी को बेस्ट मेल डांसर और पूजा को बेस्ट फीमेल डांसर के खिताब से सम्मानित किया गया। दोनों प्रतिभागियों की उपलब्धि ने आयोजन की यादगार शाम को खास बना दिया।
महोत्सव ने यह संदेश भी दिया कि लोक परंपराएँ केवल अतीत की विरासत नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी और उत्साह से जीवंत रहने वाली सांस्कृतिक धरोहर हैं।
पेसिफिक कॉलेज की यह शाम गुजराती लोक संस्कृति के रंगों, संगीत की मिठास और सामूहिक उल्लास की ऐसी यादें छोड़ गई, जिनकी खनक प्रतिभागियों के मन में लंबे समय तक बनी रहेगी।
रिपोर्ट एवं फोटो: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


