Thursday, October 15, 2026

नाखूनों की बीमारियाँ: लक्षण, कारण, बचाव और उपचार की पूरी जानकारी

जयपुर | शाबाश इंडिया।

नाखून हमारे शरीर का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। नाखूनों की बनावट, रंग, मोटाई, सतह और बढ़ने की गति में होने वाले बदलाव कभी-कभी संक्रमण, चोट, पोषण की कमी या अन्य बीमारियों का संकेत हो सकते हैं। नाखूनों से जुड़ी समस्याएँ हाथों और पैरों, दोनों में हो सकती हैं। इसलिए इन बदलावों पर समय रहते ध्यान देना और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

नाखूनों की बीमारियाँ क्या हैं?

नाखूनों के रंग, आकार, सतह, मोटाई या उनके आसपास की त्वचा में होने वाले असामान्य बदलावों को नाखून संबंधी विकार कहा जाता है। कुछ समस्याएँ सामान्य देखभाल से ठीक हो सकती हैं, जबकि कुछ में चिकित्सकीय जाँच और उचित उपचार की आवश्यकता होती है।

नाखूनों की बीमारियों के प्रमुख कारण

  • फंगल संक्रमण: फंगस के कारण नाखून पीले, मोटे, भुरभुरे या टूटने वाले हो सकते हैं।
  • चोट लगना: नाखून पर चोट या दबाव पड़ने से उसके नीचे खून जमा हो सकता है और रंग बदल सकता है।
  • बैक्टीरियल संक्रमण: नाखून के किनारे लालिमा, सूजन, दर्द और कभी-कभी मवाद हो सकता है।
  • पोषक तत्त्वों की कमी: आयरन की कमी और अपर्याप्त पोषण से नाखून कमजोर या भंगुर हो सकते हैं।
  • त्वचा रोग: सोरायसिस, एक्जिमा और कुछ अन्य त्वचा रोग नाखूनों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • अनुचित देखभाल: नाखून चबाना, क्यूटिकल काटना, रसायनों के बार-बार संपर्क में आना और बहुत तंग जूते पहनना भी समस्याएँ पैदा कर सकता है।
  • अन्य बीमारियाँ: थायरॉयड संबंधी विकार, मधुमेह और कुछ दीर्घकालिक बीमारियों के कारण नाखूनों में बदलाव हो सकते हैं।
  • बढ़ती उम्र: उम्र के साथ नाखूनों का सूखा, मोटा या भंगुर होना आम है।

नाखूनों की प्रमुख बीमारियों के प्रकार

1. नाखूनों में फंगल संक्रमण (Onychomycosis)

लक्षण: नाखूनों का पीला या सफेद होना, मोटा होना, टूटना, भुरभुरा होना और नाखून का त्वचा से अलग होना।

कारण: फंगल संक्रमण, पैरों में नमी, संक्रमित उपकरणों का साझा उपयोग और तंग जूते पहनना।

उपचार: संक्रमण की पुष्टि के बाद चिकित्सक एंटीफंगल दवाएँ या औषधीय नेल-लैकर दे सकते हैं। उपचार संक्रमण की गंभीरता और नाखून की स्थिति के अनुसार किया जाता है।

2. नाखून के आसपास संक्रमण (Paronychia)

लक्षण: नाखून के किनारे लालिमा, दर्द, सूजन, गर्माहट और कभी-कभी मवाद होना।

कारण: नाखून चबाना, त्वचा में चोट लगना या बैक्टीरिया का संक्रमण।

उपचार: संक्रमण की गंभीरता के अनुसार चिकित्सक उपचार करते हैं। मवाद होने पर उसे स्वयं दबाकर निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

3. नाखून का सोरायसिस (Nail Psoriasis)

लक्षण: नाखूनों पर छोटे गड्ढे, खुरदरापन, रंग में बदलाव, मोटापन और नाखून का अपनी जगह से अलग होना।

कारण: सोरायसिस से जुड़ी प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी।

उपचार: त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह से स्थानीय या अन्य उपयुक्त दवाएँ दी जाती हैं।

4. नाखून का त्वचा में धँसना (Ingrown Nail)

लक्षण: विशेषकर पैर के अंगूठे में दर्द, लालिमा और सूजन।

कारण: नाखून को किनारों से बहुत छोटा या गलत तरीके से काटना तथा तंग जूते पहनना।

बचाव: नाखूनों को सीधे काटें और आरामदायक जूते पहनें। दर्द, सूजन या संक्रमण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

5. नाखूनों का कमजोर या भंगुर होना (Brittle Nails)

लक्षण: नाखूनों का बार-बार टूटना, परतों में छिलना या उनमें दरारें पड़ना।

कारण: बार-बार पानी और डिटर्जेंट के संपर्क में आना, चोट, बढ़ती उम्र, आयरन की कमी या थायरॉयड संबंधी समस्याएँ।

उपचार: कारण के अनुसार उपचार किया जाता है। मॉइस्चराइज़र का उपयोग और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय जाँच लाभकारी हो सकती है।

6. चम्मच के आकार के नाखून (Koilonychia)

लक्षण: नाखून बीच से धँसा हुआ और किनारों से ऊपर उठा दिखाई देना।

संभावित कारण: आयरन की कमी, रक्ताल्पता (एनीमिया) या कभी-कभी अन्य बीमारियाँ।

उपचार: कारण की जाँच करके उसी के अनुसार उपचार किया जाता है। बिना जाँच के आयरन की गोलियाँ लेना उचित नहीं है।

7. नाखून के नीचे खून जमना (Subungual Hematoma)

लक्षण: चोट के बाद नाखून के नीचे लाल, बैंगनी या काला निशान दिखाई देना और दर्द होना।

कारण: उँगली दब जाना, चोट लगना या भारी वस्तु गिरना।

उपचार: तेज दर्द, गंभीर चोट या नाखून उखड़ने पर शीघ्र चिकित्सा सहायता लें। बिना चोट के काला निशान दिखाई देने पर या उसके बढ़ने पर भी जाँच कराना आवश्यक है।

8. नाखून के आसपास गैंगरीन का खतरा

गैंगरीन एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर के किसी हिस्से के ऊतकों को पर्याप्त रक्त न मिलने या गंभीर संक्रमण के कारण नुकसान पहुँच सकता है। यह नाखून की सामान्य बीमारी नहीं है, लेकिन विशेषकर मधुमेह या रक्त संचार की समस्या वाले लोगों में पैर के घाव और संक्रमण गंभीर रूप ले सकते हैं।

लक्षण: त्वचा का काला या नीला पड़ना, घाव का बढ़ना, बदबूदार स्राव, सुन्नपन या तेज दर्द। कभी-कभी गंभीर संक्रमण में दर्द कम भी महसूस हो सकता है।

उपचार: ऐसे लक्षणों में तुरंत अस्पताल में जाँच और उपचार आवश्यक है। घरेलू उपचार के भरोसे इंतजार न करें।

नाखूनों की बीमारियों के सामान्य लक्षण

  • नाखूनों का पीला, सफेद, भूरा या काला पड़ना।
  • नाखूनों का मोटा, पतला या भुरभुरा होना।
  • नाखूनों पर गड्ढे, धारियाँ या दरारें बनना।
  • नाखून का अपनी जगह से उठना या अलग होना।
  • नाखून के आसपास दर्द, लालिमा, सूजन या मवाद होना।
  • नाखूनों की वृद्धि धीमी होना या उनका आकार बदलना।

केवल रंग या आकार देखकर किसी बीमारी की निश्चित पहचान नहीं की जा सकती। अलग-अलग बीमारियों में मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

नाखूनों की बीमारियों से बचाव

1. नाखूनों की नियमित सफाई करें: नाखूनों को साफ और उचित लंबाई में रखें। काटने के उपकरण साफ रखें और दूसरों के साथ साझा न करें।

2. हाथ-पैर सूखे रखें: पैरों को धोने के बाद अच्छी तरह सुखाएँ। साफ मोजे पहनें और हवा आने-जाने वाले जूते चुनें।

3. रसायनों से सुरक्षा करें: सफाई के काम में दस्ताने पहनें। क्यूटिकल काटने, नाखून चबाने और नाखूनों के आसपास की त्वचा को खुरचने से बचें।

4. संतुलित आहार लें: दालें, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन को भोजन में शामिल करें। आयरन या अन्य पोषक तत्त्वों की कमी का संदेह हो तो जाँच कराएँ।

5. सही जूते पहनें: बहुत तंग जूते पहनने से बचें, क्योंकि उनसे नाखूनों पर दबाव और चोट लग सकती है।

इन उपायों से संक्रमण और चोट का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

नाखूनों की बीमारियों में कौन-सी जाँचें होती हैं?

बीमारी के प्रकार और लक्षणों के आधार पर चिकित्सक निम्न जाँचों की सलाह दे सकते हैं:

  • नाखूनों की शारीरिक जाँच: रंग, आकार, मोटाई, सतह और आसपास की त्वचा की स्थिति देखी जाती है।
  • नाखून की खुरचन की माइक्रोस्कोपी: फंगल संक्रमण की जाँच के लिए।
  • फंगल कल्चर या अन्य प्रयोगशाला जाँच: संक्रमण के कारण की पहचान करने के लिए।
  • CBC और फेरिटिन: एनीमिया या आयरन की कमी का संदेह होने पर।
  • थायरॉयड जाँच: लक्षणों के आधार पर थायरॉयड संबंधी विकार की जाँच के लिए।
  • अन्य जाँच या बायोप्सी: असामान्य, लगातार बने रहने वाले या संदिग्ध बदलावों में आवश्यकता के अनुसार।

हर व्यक्ति को सभी जाँचों की आवश्यकता नहीं होती। विशेषकर फंगल संक्रमण में सही पहचान महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि सोरायसिस, चोट और अन्य समस्याएँ भी मिलते-जुलते लक्षण पैदा कर सकती हैं।

नाखूनों की बीमारियों में होम्योपैथिक उपचार

होम्योपैथिक चिकित्सा में रोगी के लक्षणों, समस्या की अवधि और व्यक्तिगत विशेषताओं के आधार पर दवा चुनने की परंपरा है। हालाँकि, नाखूनों के फंगल संक्रमण, बैक्टीरियल संक्रमण और अन्य नाखून संबंधी बीमारियों को ठीक करने में होम्योपैथी की प्रभावशीलता के पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

इसलिए किसी विशिष्ट होम्योपैथिक दवा या उसकी खुराक को नाखूनों की बीमारियों का प्रमाणित उपचार नहीं माना जाना चाहिए। आवश्यक जाँच और प्रभावी उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।

  • फंगल संक्रमण में: त्वचा रोग विशेषज्ञ से जाँच कराकर उपयुक्त एंटीफंगल उपचार लें।
  • नाखूनों की भंगुरता में: पोषण की कमी या अन्य अंतर्निहित कारणों की जाँच कराएँ।
  • सोरायसिस में: चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार अपनाएँ।
  • नाखून के आसपास सूजन या मवाद में: उचित चिकित्सकीय उपचार कराएँ।

यदि कोई व्यक्ति होम्योपैथिक परामर्श लेना चाहता है, तो उसे प्रमाणित चिकित्सा का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। किसी भी होम्योपैथिक दवा का सेवन करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लें।

होम्योपैथी में नाखूनों की समस्याओं के लिए जिन दवाओं का उल्लेख किया जाता है, उनमें ऐन्टिम क्रूड, ग्रेफाइटिस, साइलीशिया, आर्सेनिक ऐल्बम, थूजा, ऐक्सरे, सोरीनम, नेट्रम म्यूर, सल्फर, कल्केरिया सल्फ, नेट्रम सल्फ, सेबाडिला, नाइट्रिकम एसिड, हाइपेरिकम, सारसापैरिला, सिपा, फ्लोरिक एसिड, पेट्रोलियम, मर्क सोल, फास्फोरस और कोनियम शामिल हैं। इन दवाओं की सूची का अर्थ यह नहीं है कि इनकी प्रभावशीलता नाखूनों की बीमारियों में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। दवा का चयन या सेवन स्वयं न करें।

किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

  • नाखून के आसपास लालिमा, सूजन, तेज दर्द या मवाद बढ़ रहा हो।
  • मधुमेह होने पर पैर के नाखून के आसपास घाव या संक्रमण हो।
  • त्वचा काली या नीली पड़ रही हो अथवा गैंगरीन का संदेह हो।
  • बिना स्पष्ट चोट के नाखून पर नई काली या भूरी लंबी पट्टी दिखाई दे, विशेषकर यदि वह बढ़ रही हो या आसपास की त्वचा तक फैल रही हो।
  • नाखून अचानक उखड़ जाए या गंभीर चोट लग जाए।
  • नाखून के रंग या आकार में लगातार बदलाव हो और उसका कारण स्पष्ट न हो।

निष्कर्ष

नाखूनों की बीमारियों का सही उपचार उनके वास्तविक कारण की पहचान पर निर्भर करता है। नियमित सफाई, नमी से बचाव, संतुलित पोषण और समय पर चिकित्सकीय जाँच महत्त्वपूर्ण हैं। केवल नाखूनों के रंग या बनावट के आधार पर दवा लेना उचित नहीं है। योग्य चिकित्सक ही जाँच के बाद उचित उपचार की सलाह दे सकता है।

डॉ. एम. एल. जैन ‘मणि’
एम.ए., बी.एम.एस. (होम्योपैथिक), पीएच.डी.
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य, होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर।
मोबाइल: 8949032693

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