Saturday, October 10, 2026

‘धर्म सिखाओ, धर्म बचाओ’ के उद्घोष से गूंजा कोलकाता, धर्म जागृति संस्थान के राष्ट्रीय अधिवेशन में राजस्थान को लगातार चौथी बार प्रथम पुरस्कार

कोलकाता | शाबाश इंडिया।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित विवेक विहार क्लब हाउस, बंगवासी में परम पूज्य अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महामुनिराज ससंघ के पावन सानिध्य में अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान का दशम राष्ट्रीय अधिवेशन भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। अधिवेशन में देश के 19 प्रदेशों से आए प्रतिनिधियों, धर्मनिष्ठ कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और महिला मंडलों ने भाग लिया। सम्मेलन में जैन धर्म के प्रचार-प्रसार, धार्मिक संस्कारों के संरक्षण, युवा पीढ़ी में धर्म के प्रति जागरूकता, सामाजिक एकता और संगठन की मजबूती जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चिंतन-मनन किया गया।

अधिवेशन का प्रमुख उद्घोष ‘धर्म सिखाओ, धर्म बचाओ’ रहा। इसके माध्यम से जैनत्व के संरक्षण, संवर्धन और भावी पीढ़ी को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया गया। वर्षभर धार्मिक, सामाजिक और सेवा कार्यों में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं एवं संस्थाओं को सम्मानित कर उनके योगदान का अभिनंदन किया गया।

ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण से हुआ शुभारंभ

अधिवेशन के संयोजक डॉ. नीरज जैन, दिल्ली के अनुसार, दो सत्रों में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के प्रथम सत्र का शुभारंभ ध्वजारोहण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण के साथ हुआ। आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के ससंघ सानिध्य में आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की मंगल शुरुआत की गई।

19 प्रदेशों ने प्रस्तुत किया वर्षभर के कार्यों का विवरण

प्रथम सत्र में राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सहित देश के 19 प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने वर्षभर में किए गए धार्मिक, सामाजिक, सेवाभावी और संगठनात्मक कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। विभिन्न प्रांतीय अध्यक्षों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों, जनजागरण अभियानों, सेवा गतिविधियों और संगठन विस्तार के प्रयासों की जानकारी साझा की।

इस दौरान विभिन्न प्रदेशों के कार्यों की समीक्षा करते हुए भविष्य की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने, कार्यकर्ताओं की सहभागिता बढ़ाने और अधिकाधिक लोगों को संगठन से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधियों ने अनुभव साझा किए और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

‘मैं’ से ‘हम’ की भावना अपनाएं, तभी होगा वास्तविक विकास : आचार्य श्री वसुनंदी जी

परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी महामुनिराज ने अपने मंगलकारी उद्बोधन में संगठन की उपयोगिता, सामाजिक एकता, सेवा भावना और आत्मसमर्पण के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़ने पर संपर्क, समन्वय, सहयोग, सहभागिता, सद्भाव और समर्पण जैसी भावनाओं का विकास होता है। ये गुण संगठन को सशक्त बनाने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

आचार्यश्री के प्रेरणादायी संदेश के दौरान ‘धर्म सिखाओ, धर्म बचाओ’ के उद्घोष से सभागार गूंज उठा। उपस्थित प्रतिनिधियों ने धर्म, संस्कारों और सामाजिक जागरूकता के प्रसार के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। प्रथम सत्र का संचालन विधि जैन, मुंबई एवं मनोज जैन शास्त्री, दिल्ली ने किया।

महिला शक्ति ने दिया जागरूकता और संगठन विस्तार का संदेश

संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन, दिल्ली के अनुसार, मध्याह्न के बाद द्वितीय सत्र का शुभारंभ कोलकाता महिला मंडल एवं उत्तम नगर, दिल्ली महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ। महिला मंडलों की सहभागिता ने धार्मिक आस्था, संस्कार संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

एक प्रज्वलित दीप अनंत दीपों को प्रकाशित कर सकता है : आर्यिका वर्धस्व नंदनी माताजी

द्वितीय सत्र में आर्यिका वर्धस्व नंदनी माताजी ने दीपक का उदाहरण देते हुए संगठन की शक्ति और व्यक्तिगत जागरूकता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि एक प्रज्वलित दीपक अनंत दीपों को प्रकाशित करने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके लिए उसका स्वयं प्रज्वलित होना आवश्यक है।

इसी प्रकार संगठन का प्रत्येक सक्रिय और जागरूक कार्यकर्ता दूसरों को धर्म, संस्कार और सामाजिक सेवा से जोड़ सकता है। एक व्यक्ति की सकारात्मक पहल समाज में व्यापक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

राष्ट्रीय अधिवेशन में 60 प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित

अधिवेशन में विभिन्न शाखाओं से आए महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं ने संस्थान के विकास और भावी कार्ययोजना को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निकुंज जैन, डॉ. नीरज जैन, इंजीनियर भूपेंद्र जैन, राजकमल सरावगी, रमेश चंद गर्ग, सीए संजय जैन, संजीव जैन, दिल्ली, विनोद मिलेनियम, फिरोजाबाद, संजय जैन बड़जात्या, कामवन तथा मनोज जैन शास्त्री सहित अन्य पदाधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।

चर्चा के दौरान आगामी जनगणना में धर्म के कॉलम में जैन धर्म दर्ज कराने के प्रति जागरूकता, सरकारी योजनाओं एवं अल्पसंख्यक विभाग में भागीदारी सुनिश्चित करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने, युवाओं को संस्थान में अवसर देने तथा देव-शास्त्र-गुरु के प्रति समर्पित भाव से धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर प्रस्ताव रखे गए। कुल 60 प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किए गए। द्वितीय सत्र का संचालन संस्थान के राष्ट्रीय प्रचार मंत्री संजय जैन बड़जात्या ने किया।

कर्मठ कार्यकर्ताओं और संस्थाओं का सम्मान

राष्ट्रीय अधिवेशन में वर्षभर उत्कृष्ट धार्मिक, सामाजिक और सेवाभावी कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया। कलकत्ता (बंगाल) इकाई के अध्यक्ष संजय काला इस्पात, नवनीत बज, आर्यन जैन, अरुण जैन सहित स्थानीय सेवा भावी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी धार्मिक संगठन की सफलता तभी सार्थक होती है, जब उसके प्रयास समाज में संस्कार, सद्भाव, सहयोग और सेवा की भावना को मजबूत करें।

राजस्थान प्रांत को लगातार चौथी बार प्रथम पुरस्कार

अधिवेशन के समापन पर वर्षभर किए गए कार्यों के आधार पर राजस्थान प्रांत को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए लगातार चौथी बार प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार प्रांतीय अध्यक्ष पदम चंद जैन बिलाला, पंकज लुहाड़िया, संजय जैन बड़जात्या और रमेश गर्ग ने ग्रहण किया।

वहीं, द्वितीय पुरस्कार युवा प्रकोष्ठ को प्रदान किया गया। युवा प्रकोष्ठ की ओर से राष्ट्रीय पदाधिकारी गौरव जैन, अंकुर जैन, पुणे, अंशुल जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने पुरस्कार ग्रहण किया। तृतीय पुरस्कार महिला प्रकोष्ठ को दिया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रदेशों से आए महिला एवं पुरुष शाखाओं के कार्यकर्ताओं और अतिथियों का भी अभिनंदन किया गया।

महिला एवं बाल प्रकोष्ठ का गठन

महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष रैना जैन के अनुसार, अधिवेशन में विभिन्न महिला शाखाओं ने भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस दौरान नई महिला शाखाओं के गठन के साथ ‘बाल प्रकोष्ठ’ का भी गठन किया गया। कोलकाता बाल प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों का सम्मान किया गया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। स्थानीय समाज के प्रतिनिधियों ने भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

अधिवेशन का समग्र संदेश यही रहा कि धर्म की रक्षा केवल उद्घोष तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कारों के प्रसार, नई पीढ़ी को सही दिशा देने, सामाजिक एकता बढ़ाने और सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी से संभव है। आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस सम्मेलन ने धर्म जागृति, संगठनात्मक एकता और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित किया।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar