Thursday, October 1, 2026

बांझपन: महिला ही नहीं, पुरुष भी हो सकते हैं जिम्मेदार, समय पर जांच से संभव है उपचार

विशेष आलेख | शाबाश इंडिया।

बांझपन (Infertility) वह स्थिति है, जिसमें नियमित रूप से बिना गर्भनिरोधक के संबंध बनाने के बावजूद एक वर्ष या उससे अधिक समय तक गर्भधारण नहीं हो पाता। यह केवल महिला की समस्या नहीं है। इसके कारण महिला, पुरुष, दोनों में हो सकते हैं या कुछ मामलों में कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। इसलिए पति-पत्नी दोनों की जांच और सही समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।

बांझपन के प्रकार

बांझपन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। प्राथमिक बांझपन वह स्थिति है, जिसमें पहले कभी गर्भधारण नहीं हुआ हो। वहीं, द्वितीयक बांझपन में पहले गर्भधारण या संतान हो चुकी होती है, लेकिन बाद में दोबारा गर्भधारण करने में परेशानी आती है।

महिलाओं में बांझपन के प्रमुख कारण

महिलाओं में अंडोत्सर्जन यानी अंडाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया में गड़बड़ी, पीसीओएस (PCOS), फैलोपियन ट्यूब में रुकावट, एंडोमेट्रियोसिस, गर्भाशय में फाइब्रॉइड या अन्य संरचनात्मक समस्याएं बांझपन का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा थायरॉयड और अन्य हार्मोन संबंधी असंतुलन तथा बढ़ती उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में कमी आने से भी गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।

पुरुषों में भी हो सकती है प्रजनन संबंधी समस्या

पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम होना, उनकी गति या आकार में असामान्यता, वीर्य के मार्ग में रुकावट और हार्मोन संबंधी समस्याएं बांझपन के कारण बन सकती हैं। कुछ मामलों में वेरिकोसील या वृषण से जुड़ी अन्य समस्याएं भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती हैं।

धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा और कुछ पर्यावरणीय विषैले पदार्थ भी महिला एवं पुरुष की प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

बांझपन की जांच कैसे होती है?

बांझपन के कारणों का पता लगाने के लिए पति-पत्नी दोनों की जांच साथ-साथ कराना महत्वपूर्ण है। इससे समस्या की पहचान करने और उचित उपचार तय करने में मदद मिलती है।

महिलाओं में मासिक धर्म चक्र और अंडोत्सर्जन का मूल्यांकन, स्त्री रोग संबंधी जांच, अल्ट्रासाउंड तथा आवश्यकता के अनुसार टीएसएच और अन्य हार्मोन की जांच की जाती है। चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार ओवेरियन रिजर्व यानी अंडाशय में उपलब्ध अंडों की स्थिति का आकलन और फैलोपियन ट्यूब खुली हैं या नहीं, इसकी जांच भी की जा सकती है।

पुरुषों में सीमन एनालिसिस (वीर्य जांच) के माध्यम से शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और आकार का मूल्यांकन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर हार्मोन संबंधी और अन्य जांचें भी की जाती हैं।

कब करानी चाहिए जांच?

सामान्यतः 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में नियमित प्रयास के बावजूद 12 महीने तक गर्भधारण न होने पर जांच शुरू करानी चाहिए। 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में छह महीने बाद ही विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है। 40 वर्ष से अधिक उम्र में जल्द मूल्यांकन कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।

यदि मासिक धर्म अनियमित है, एंडोमेट्रियोसिस या फैलोपियन ट्यूब संबंधी समस्या पहले से ज्ञात है अथवा पुरुष में प्रजनन संबंधी परेशानी है, तो एक वर्ष तक इंतजार करने के बजाय पहले ही विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

बांझपन का उपचार कैसे किया जाता है?

बांझपन का उपचार उसके वास्तविक कारण पर निर्भर करता है। अंडोत्सर्जन में समस्या होने पर उसके अनुसार उपचार किया जाता है। पीसीओएस, थायरॉयड या अन्य हार्मोन संबंधी समस्याओं का प्रबंधन किया जाता है। फैलोपियन ट्यूब में रुकावट और गर्भाशय की संरचनात्मक समस्याओं के लिए आवश्यकतानुसार उपचार किया जा सकता है।

पुरुषों में शुक्राणुओं से संबंधित समस्याओं की पहचान करके उनका उपचार किया जाता है। कुछ परिस्थितियों में सहायक प्रजनन तकनीकों, जैसे आईवीएफ (IVF), की मदद भी ली जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की उपचार संबंधी सिफारिशों में बांझपन के अलग-अलग कारणों के अनुसार उपचार का चयन करने पर जोर दिया गया है। इसलिए हर दंपती के लिए एक जैसा उपचार उपयुक्त नहीं होता।

होम्योपैथिक उपचार के बारे में जानना भी जरूरी

होम्योपैथी में व्यक्ति के लक्षणों और उसकी स्थिति के आधार पर दवाएं चुनने की परंपरा है। हालांकि, बांझपन को दूर करने में होम्योपैथिक दवाओं की प्रभावशीलता के समर्थन में अभी विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं हैं। इसलिए केवल होम्योपैथी पर निर्भर रहकर प्रमाणित जांच और उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति होम्योपैथिक उपचार लेना चाहता है, तो उसे अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ या फर्टिलिटी विशेषज्ञ को इसकी जानकारी देकर सलाह लेनी चाहिए। ट्यूब में रुकावट, गंभीर पुरुष-कारक बांझपन, एंडोमेट्रियोसिस या उम्र से संबंधित प्रजनन समस्याओं में समय पर विशेषज्ञ उपचार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। होम्योपैथी को प्रमाणित उपचार का विकल्प मानने के बजाय किसी भी अतिरिक्त उपचार के बारे में चिकित्सक से चर्चा करना उचित है।

बांझपन किसी की गलती नहीं, दोनों की जांच जरूरी

बांझपन को केवल महिला की कमी मानना सही नहीं है। कई बार पुरुष अपनी जांच कराने से बचते हैं और समस्या का पूरा जिम्मा महिला पर डाल दिया जाता है, जबकि बांझपन का कारण पुरुष, महिला, दोनों या कभी-कभी अज्ञात भी हो सकता है। इसलिए पति-पत्नी दोनों की जांच समान रूप से जरूरी है।

सही समय पर जांच, कारण की पहचान और उचित उपचार से गर्भधारण की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। संकोच या सामाजिक दबाव के कारण जांच टालने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना ही समझदारी है।

—डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’
एम.ए., बी.एच.एम.एस. (होम्योपैथिक), पीएच.डी.
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य, होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर।

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