
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
रंग जब कागज या कैनवास पर उतरते हैं तो केवल तस्वीर नहीं बनाते, बल्कि सोच, संवेदना और भविष्य की दिशा भी रचते हैं। इसी रचनात्मक दृष्टि को नई पीढ़ी के करियर से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी एंड मास कम्युनिकेशन कॉलेज में ‘फाइन आर्ट्स 2.0’ का भव्य शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कला की पारंपरिक दुनिया से आगे बढ़कर उसके आधुनिक स्वरूप, बदलती तकनीक और नए करियर विकल्पों से परिचित कराया गया। आयोजन के दौरान रंग, रेखा, कल्पना और रचनात्मकता के विविध आयाम देखने को मिले।
संघ चेयरपर्सन आशीष अग्रवाल ने बताया कि ‘फाइन आर्ट्स 2.0’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को कला के विभिन्न आयामों से जोड़कर उनकी रचनात्मक क्षमताओं को नई दिशा देना है। उन्होंने कहा कि आज कला केवल पेंटिंग और कैनवास तक सीमित नहीं है, बल्कि फैशन, डिजाइन, विज्ञापन, मीडिया, डिजिटल आर्ट, इलस्ट्रेशन और विजुअल कम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
इस अवसर पर फाइन आर्ट्स फैकल्टी राजेश यादव ने विद्यार्थियों को कला की विभिन्न स्ट्रीम की जानकारी दी। उन्होंने ड्रॉइंग, स्केचिंग, पेंटिंग और इलस्ट्रेशन सहित विभिन्न कला विधाओं के तकनीकी एवं रचनात्मक पक्ष समझाए। उन्होंने बताया कि कला में करियर बनाने के लिए कल्पनाशक्ति के साथ निरंतर अभ्यास, बारीकी से अवलोकन और अपनी अलग पहचान विकसित करना आवश्यक है।
राजेश यादव ने विद्यार्थियों से कहा कि कलाकार वही है जो सामान्य दृश्य में भी असाधारण अनुभूति तलाश सके। बदलते दौर में हुनर और तकनीक का मेल कला विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।
‘फाइन आर्ट्स 2.0’ का शुभारंभ विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक शुरुआत नहीं, बल्कि अपने हुनर को पहचानने, उसे निखारने और रंगों के जरिए भविष्य का नया कैनवास तैयार करने की प्रेरक पहल के रूप में सामने आया।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’
फोटो: दीपक तेली


