
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में चल रहा दस दिवसीय दिवेर विजय महोत्सव-2026 सोमवार को कला, संस्कृति, तकनीक और युवा ऊर्जा के अनूठे संगम में बदल गया। एक ओर राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में कलाकारों ने मेवाड़ के इतिहास और शौर्य को रंगों व रेखाओं के माध्यम से कैनवास पर जीवंत किया, वहीं फोटो वॉक, रील मेकिंग और इलेक्ट्रिक हॉवरबोर्ड राइड ने युवाओं को इस गौरवशाली विरासत से आधुनिक अंदाज में जोड़ने का काम किया।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केंद्र में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार तथा प्रताप गौरव केंद्र के संयुक्त तत्वावधान और संस्कार भारती उदयपुर महानगर इकाई के सहयोग से ‘मेवाड़ का सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिदृश्य’ विषय पर राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का विशेष सत्र आयोजित किया गया।
उद्घाटन अवसर पर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु कैलाश डागा ने देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे चित्रकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि मेवाड़ की धरती का प्रत्येक कण त्याग, संघर्ष और शौर्य की स्मृतियों से जुड़ा है। कलाकार जब इन गाथाओं को रंगों और रेखाओं में ढालते हैं तो इतिहास केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नई पीढ़ी के सामने दृश्य अनुभूति के रूप में जीवंत हो उठता है। उन्होंने कहा कि कलाकारों का सृजन भावी पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना जगाने का माध्यम बनता है।
कार्यशाला संयोजक प्रो. रामसिंह भाटी ने बताया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के कलाकार इसमें भाग ले रहे हैं। इनमें डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, मनोजकुमार सकळे, कुदालैय्या हिरेमढ, घनश्याम कश्यप, डॉ. मनोज बालियान, डॉ. सुनील कुमार सिंह कुशवाहा, डॉ. दुर्जन सिंह राणा, दीपांकर रे, अभिषेक सुरेश आचार्य, विवेक दहिवले, ऋषि राज तोमर, ओंकार अशोक पवार, अद्वैत किशोर नादवडेकर, अंकुश कुमार, विजय चंद्रकांत जाधव, डॉ. मुकेश सालवी, डॉ. पुष्कर लोहार, नवल सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह चुण्डावत और मांगीलाल महावर शामिल हैं। सभी कलाकारों का उपरणा ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।
विशेष सत्र का आकर्षण जम्मू-कश्मीर के कलाकार अंकुश कुमार का लाइव आर्ट डेमोंस्ट्रेशन रहा। उन्होंने दर्शकों और विद्यार्थियों के सामने महाराणा प्रताप का प्रभावशाली चित्र उकेरा। देखते ही देखते सफेद कैनवास पर महाराणा प्रताप की तेजस्वी छवि आकार लेने लगी और कला प्रेमियों ने पूरी प्रक्रिया को उत्सुकता से देखा।
महोत्सव में पहली बार आयोजित दो दिवसीय फोटो एवं रील मेकिंग वॉक ने भी युवाओं को आकर्षित किया। प्रातः और सायं सत्रों में प्रतिभागियों ने प्रताप गौरव केंद्र के स्थापत्य, प्राकृतिक परिवेश, प्रतिमाओं और ऐतिहासिक प्रसंगों को कैमरे एवं स्मार्टफोन में अलग-अलग दृष्टिकोण से कैद किया। इस पहल ने मेवाड़ की परंपरागत वीरगाथाओं को डिजिटल अभिव्यक्ति और सोशल मीडिया की नई भाषा से जोड़ने का अवसर दिया।
युवाओं के लिए इलेक्ट्रिक हॉवरबोर्ड राइड भी आकर्षण का केंद्र बनी। प्रताप गौरव केंद्र में 21 सितंबर से शुरू हुई इस सुविधा का सामान्य शुल्क 250 रुपए प्रति 15 मिनट निर्धारित किया गया है, जबकि दिवेर विजय महोत्सव के दौरान 26 सितंबर तक इसे 100 रुपए के विशेष रियायती शुल्क पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
इधर, शहर में महोत्सव की गूंज नुक्कड़ नाटक ‘दिवेर का रणघोष’ के माध्यम से भी सुनाई दी। हिरण मगरी सेक्टर-4 चौराहे पर कलाकारों ने ओजपूर्ण संवाद और प्रभावी अभिनय के जरिए दिवेर युद्ध की स्मृतियों तथा महाराणा प्रताप के संघर्ष को जनमानस के सामने जीवंत किया। मंगलवार शाम नाटक का अगला मंचन पानेरियों की मादड़ी स्थित वानरेश्वर महादेव मंदिर परिसर में होगा।
दिवेर विजय महोत्सव इतिहास को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखकर कला, तकनीक, दृश्य माध्यम और जनसंवाद के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने का मंच बन रहा है।
रिपोर्ट: कौशल मूंदड़ा/फोटो: गजेंद्र कुमावत


