Wednesday, September 23, 2026

नीचे बैठने वाला ही ऊपर उठता है, विनम्रता से ही उच्च गोत्र का बंध होता है : मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी

इंदौर | शाबाश इंडिया।

दलाल बाग मैदान में चल रहे विशाल श्रावक संस्कार शिविर में शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत एवं राजकीय अतिथि मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन में कुछ अलग करने की इच्छा रखता है। कमल की उपमा देते हुए उन्होंने कहा कि कमल कीचड़ में उगता है, लेकिन खिलने के बाद पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। जीवन में भी जो व्यक्ति विनम्र होकर नीचे बैठना सीखता है, वही वास्तविक अर्थों में ऊपर उठता है और उच्च गोत्र का बंध करता है।

उन्होंने कहा कि बड़े व्यक्ति के पास छोटा व्यक्ति बैठ जाए तो बड़े व्यक्ति का सम्मान और बढ़ता है, लेकिन बड़े व्यक्ति को स्वयं छोटे व्यक्ति के पीछे जाकर बैठने की विनम्रता रखनी चाहिए। भक्ति में अहंकार नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण का भाव होना चाहिए।

मुनि श्री ने कहा कि अपनी भक्ति में ऐसा समर्पण और पुरुषार्थ होना चाहिए कि गुरु की इच्छा ही अपनी इच्छा बन जाए। उन्होंने शिविरार्थियों को नशामुक्त जीवन, रात्रि भोजन का त्याग तथा गरीबों की सेवा और गौशालाओं में दान जैसे संकल्पों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि पराई वस्तु को देखकर मन में लालच नहीं आना चाहिए। जैन दर्शन का सूत्र ‘इच्छा निरोधों तपाः’ अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं के निरोध का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि त्यागी-व्रती, गरीब, भिखारी या दरिद्र व्यक्ति से घृणा नहीं करनी चाहिए। पशु-पक्षियों के प्रति भी द्वेष का भाव नहीं रखना चाहिए और पराए धन पर नीयत खराब नहीं करनी चाहिए। अपनी सीमाओं में रहकर धन-धान्य का संग्रह करना चाहिए।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि पूज्य गुरुदेव का संदेश सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार पूजा-पाठ करने की स्वतंत्रता का सम्मान करने पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आए शिविरार्थियों ने दस दिनों तक घर-परिवार, वस्त्र-आभूषण और मोबाइल आदि का त्याग कर शिविर में सहभागिता की है। शिविर में सीखी बातों को जीवनभर अपनाकर अपने-अपने नगरों में अभियान के रूप में आगे बढ़ाना चाहिए।

प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया ने कहा कि जिज्ञासा समाधान के बाद हुई महाआरती ने इंदौर में इतिहास रच दिया। इस दौरान महाआरती का सौभाग्य शिविर पुण्यार्जक आकाश कोयला परिवार को प्राप्त हुआ।

इंदौर जैन समाज के कार्याध्यक्ष नवीन आनंद गोधा ने कहा कि धूप दशमी श्राद्ध का पर्व है और इस अवसर पर पूरे इंदौर में विभिन्न झांकियां लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी को अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ और व्रत करने का अधिकार है। भगवान राम को मानने वाले श्रीराम की पूजा करें, भगवान महावीर को मानने वाले महावीर की आराधना करें तथा हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई अपने-अपने धर्म की मान्यताओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान करें। अलग-अलग धार्मिक विचारों और आस्थाओं का सम्मान करना ही सांप्रदायिक सौहार्द एवं सद्भाव की भावना को मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि देश का कानून सभी धर्मों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने की स्वतंत्रता देता है। इस भावना का सभी को सम्मान करना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा भी प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

धर्मसभा में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया, ब्रह्मचारी विनोद भैया, चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन जी गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद जी गोधा, चक्रवर्ती मनीष जी गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक जी डोशी, स्वागताध्यक्ष संजय सामरिया, महामंत्री हर्ष जैन, मंत्री अक्षय कासलीवाल, धर्मेंद्र सिमकेम, रमेश चंद्र निर्वाणा, शिविर पुण्यार्जक आकाश कोयला, सह कोषाध्यक्ष सौरव बड़जात्या, प्राचार्य टोंग्या, शिविर निर्देशक हुकुमकाका कोटा, विजय जी धुर्रा, गिरीश गिन्नी, प्रचार प्रमुख संजय पाटौदी, सोनाली बागड़िया, अर्चना गोधा, राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली, विपुल बाझल, राजेश दददु सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar