
अजमेर | शाबाश इंडिया।
पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के मंगल अवसर पर श्री दिगंबर जैन महासमिति महिला एवं युवा महिला संभाग अजमेर की सोनी नगर इकाई की सदस्याओं द्वारा सिद्धकूट चैत्यालय टेम्पल ट्रस्ट (सोनी जी की नसियां जी) में “भोगी से योगी बने सुकुमाल मुनि” के जीवन चरित्र पर आधारित भावपूर्ण नाटिका का मंचन किया गया। नाटिका के माध्यम से सुकुमाल मुनि के वैराग्य, त्याग, कठोर साधना और अद्भुत आत्मबल को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
नाटिका में दर्शाया गया कि सुकुमाल मुनि अपने प्रारंभिक जीवन में अत्यंत विलासिता और भोग-विलास में जीवन व्यतीत करते थे। दिगंबर मुनियों के संपर्क में आने के बाद उनके भीतर वैराग्य का भाव जागृत हुआ। उन्होंने सांसारिक सुखों का त्याग कर दीक्षा ग्रहण की और इसके बाद गहन ध्यान एवं साधना में लीन हो गए।
नाटिका में उनकी कठोर साधना और आत्मबल का भी मार्मिक चित्रण किया गया। ध्यान में लीन सुकुमाल मुनि के शरीर को सियारों द्वारा खाए जाने के बावजूद वे तनिक विचलित नहीं हुए और अंततः समाधिपूर्वक अपने प्राणों का त्याग किया। इस प्रसंग ने दर्शकों को त्याग, तपस्या और आत्मसंयम का संदेश दिया।
महासमिति की राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष मधु पाटनी ने बताया कि सोनी नगर इकाई की अध्यक्ष श्रीमती चंदा डोसी के संयोजन में चांदनी पाटनी, पूजा डोसी, पिंकी बज, दक्षत गंगवाल, कनक पाटनी, नीलम डोसी, हंसा जैन, इंद्रा जैन, ममता लुहाड़िया, रंजना डोसी, मंजू गंगवाल, फलाश डोसी, नमामि जैन सहित अन्य सदस्याओं ने विभिन्न पात्रों की भूमिकाएं निभाते हुए आकर्षक एवं प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम से पूर्व महासमिति की पदाधिकारियों एवं गौरवी जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। युवा महिला संभाग अध्यक्ष सोनिका भैंसा ने बताया कि टेम्पल ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं समाजश्रेष्ठी प्रमोद जी सोनी एवं प्रतिभा जी सोनी ने नाटिका में भाग लेने वाली महिलाओं तथा अन्य सहयोगियों का उत्साहवर्धन करते हुए उपहार प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुनि संघ सेवा समिति के अध्यक्ष सुशील बाकलीवाल, ललित पांड्या, लोकेश ढीलवारी, महासमिति की सदस्याएं एवं जैन समाज के बड़ी संख्या में धर्मावलंबी उपस्थित रहे।


