
इंदौर | शाबाश इंडिया।
33वें अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर के प्रथम दिवस इंदौर में धर्म और संस्कारों से ओतप्रोत अद्भुत दृश्य देखने को मिला। देशभर से हजारों की संख्या में शिविरार्थी एवं धर्मप्रेमी समाजजन गुरुदेव की अमृतवाणी सुनने पहुंचे। पूरे परिसर में भक्ति, अनुशासन, मौन और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण नजर आया।

मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने उत्तम क्षमा धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि क्रोध शक्ति नहीं, बल्कि कमजोरी की निशानी है। व्यक्ति जब अपने से कमजोर, गरीब या अपने अधीन व्यक्ति पर क्रोध करता है, तब वह अपनी ताकत नहीं बल्कि कमजोरी प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि अपने से कमजोर पर क्रोध नहीं करना चाहिए, अपने से अधिक शक्तिशाली पर भी क्रोध नहीं करना चाहिए और पूजनीय माता-पिता, गुरु एवं भगवान के प्रति भी किसी परिस्थिति में क्रोध नहीं करना चाहिए।
मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज ने कहा, “सहारा नहीं दे सकते तो धक्का मत देना, गिरे हुए को उठा नहीं सकते तो गिराना मत। आंसू नहीं पोंछ सकते तो रुलाना मत।” उन्होंने कहा कि भगवान के सामने झुकना भक्ति है, लेकिन किसी छोटे से छोटे जीव की रक्षा के लिए झुक जाना अहिंसा और करुणा है। उन्होंने संदेश दिया कि यदि गुरु के सामने झुकने से भक्त बनते हैं, तो चींटी जैसे छोटे जीव को बचाने के लिए झुकने में भी करुणा और अहिंसा की भावना निहित है।
उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति की परीक्षा तब होती है, जब परिस्थितियां हमारे अनुकूल नहीं हों। भगवान और गुरु के प्रति श्रद्धा किसी स्वार्थ या अपेक्षा पर आधारित नहीं होनी चाहिए। काम पूरा होने पर भगवान को मानना और काम न होने पर उनसे नाराज हो जाना सच्ची भक्ति नहीं है।
भगवान श्रीराम के चरित्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य और अयोध्या का सुख छिन जाने के बाद भी श्रीराम ने माता कैकेयी के प्रति क्रोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि पूजनीय के प्रति सम्मान परिस्थितियां बदलने से नहीं बदलना चाहिए। जो हमारे पूजनीय हैं, उन्हें अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करने के बजाय स्वयं उनके अनुकूल बनने का प्रयास करना चाहिए और जो हमसे कमजोर हैं, उन्हें अपने समान समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तम क्षमा करुणा, अहिंसा और सच्चे संस्कार का मार्ग है। कमजोर का शोषण करना, अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना और अपने ही लोगों पर क्रोध करना व्यक्ति के पतन का कारण बन सकता है। उन्होंने समाजजनों से आह्वान किया कि केवल ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहकर क्षमा न मांगें, बल्कि क्षमा को अपने व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनाएं।
शिविर के प्रथम दिवस धर्मसभा में हजारों शिविरार्थियों एवं समाजजनों की उपस्थिति रही। शिविरार्थियों में अनुशासन, मौन, संयम और गुरुभक्ति का भाव देखने को मिला। प्रचार प्रमुख संजय पाटोदी ने बताया कि धर्मसभा में चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, चक्रवर्ती मनीष गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोशी, महामंत्री हर्ष जैन, आकाश कोयला, शिविर संयोजक दिनेश गंगवाल, प्रिंसिपल टोंग्या, संजय पाटोदी, हुकुमचंद जैन काका, प्रदीप ब्रह्मचारी, विनोद भैया, विजय धुर्रा, सोनाली बागड़िया, अर्चना गोधा, सौरभ बड़जात्या, विमल झांझरी, राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन उपस्थित रहे।


