Wednesday, September 16, 2026

दशलक्षण पर्व का प्रथम दिवस ‘उत्तम क्षमा’: क्रोध छोड़ करुणा और मैत्री को अपनाने का संदेश

डॉ.अल्पना जैन
महाराष्ट्र गौरव मालेगांव

“क्रोध की अग्नि को शांत कर, जो मन में करुणा जगाए,
उत्तम क्षमा का वही पावन संदेश जगत में फैलाए।जैन सिद्धांत कहता है, क्षमा ही आत्मा का निज स्वभाव है,
इसके बिना मिट पाता कभी नहीं, संसार का यह भव-भाव है।
आचार्य विद्यासागर जी कहते, क्षमा नहीं वीरों की कमजोरी है,
आत्मिक शांति और मोक्ष मार्ग के लिए यह सबसे जरूरी है।
वाणी और व्यवहार में जो सदा समता भाव रखते हैं,
वही संतजन दुष्टों के प्रति भी मन में करुणा भरते हैं।
अपराधी पर क्रोध छोड़, जो मैत्री का हाथ बढ़ाते हैं,
वे ही भव्य जीव इस धरा पर सच्चे सम्यक संन्यासी कहलाते हैं।
दस लक्षण के प्रथम दिवस पर, आओ हम सब बैर भाव को भुलाएं,
सबको गले लगाकर, अपनी आत्मा को पावन और निर्मल बनाएं।

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