
जयपुर/सांगानेर | शाबाश इंडिया।
दसलक्षण पर्व के अवसर पर श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर की ओर से देश-विदेश में व्यापक धर्मप्रभावना अभियान चलाया जाएगा। संत सुधासागर महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से संस्थान के विद्वान एवं विदुषियां इस वर्ष 700 से अधिक स्थानों पर पहुंचकर लाखों लोगों तक जैन धर्म, अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण का संदेश पहुंचाएंगे।
श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर पिछले 30 वर्षों से जैन धर्म की प्राचीन श्रमण परंपरा, मूल सिद्धांतों एवं संस्कारों के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहा है। संस्थान की स्थापना वर्ष 1996 में आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद तथा जगत पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से हुई थी। संस्थान से अब तक 1000 से अधिक विद्वान शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ सरकारी एवं सामाजिक संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बालिकाओं को संस्कारयुक्त उच्च शिक्षा का संकल्प
संस्थान की गतिविधियां केवल विद्वानों के निर्माण तक सीमित नहीं हैं। संत सुधासागर आवासीय कन्या महाविद्यालय के माध्यम से बालिकाओं को संस्कारयुक्त वातावरण में उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 250 से अधिक बालिकाएं अध्ययनरत हैं, जबकि 200 से अधिक बालिकाएं शिक्षा प्राप्त कर समाज की सेवा में योगदान दे रही हैं।
आत्मकल्याण और धर्माराधना का पर्व है दसलक्षण
जैन समाज में दसलक्षण पर्व 16 से 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य—इन दस धर्मों से युक्त यह पर्व जैन धर्म की शाश्वत परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
इन दिनों श्रावक-श्राविकाएं आत्मकल्याण की भावना से प्रेरित होकर व्रत, उपवास, पूजन, पाठ, स्वाध्याय एवं विभिन्न धार्मिक आराधनाएं करते हैं। दसलक्षण पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर नहीं, बल्कि आत्मा के गुणों को जागृत करने, जीवन में संयम एवं सदाचार अपनाने और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है।
इसी उद्देश्य से संस्थान के विद्वान एवं विदुषियां देश के विभिन्न नगरों, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर प्रवचन, धार्मिक शिक्षण एवं धर्मप्रभावना करेंगे। संस्थान का प्रयास है कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और श्रमण परंपरा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
विदेशों में भी पहुंचेगा जैन धर्म का संदेश
धर्मप्रभावना अभियान का विस्तार भारत तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थान की ओर से अमेरिका, कुवैत, युगांडा और नेपाल सहित विभिन्न देशों में भी विद्वानों को भेजा गया है। वहां जैन धर्म के मूल सिद्धांतों, अहिंसा, अनेकांत, संयम और आत्मकल्याण की भावना का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
संस्थान के अनुसार यह अभियान जैन समाज को अपनी गौरवशाली श्रमण परंपरा से जोड़ने के साथ समाज में प्रेम, मैत्री, सौहार्द एवं आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने का माध्यम बनेगा।
निःशुल्क सेवा भावना से चलाया जा रहा अभियान
श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान द्वारा यह संपूर्ण कार्य निःशुल्क सेवा भावना से किया जाता है। संस्थान का उद्देश्य किसी व्यावसायिक लाभ के बजाय जैन धर्म की प्रभावना, विद्वानों का निर्माण तथा समाज में धर्म, संस्कार, सौहार्द और मैत्री की भावना को मजबूत करना है।
इस अभियान में संस्थान की प्रबंधकारिणी समिति एवं समस्त सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। संस्थान अपनी 30 वर्षीय यात्रा और व्यापक धर्मप्रभावना अभियान के पीछे मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा, मार्गदर्शन और समर्पण को अपनी प्रमुख शक्ति मानता है।
दसलक्षण पर्व के माध्यम से संस्थान का संकल्प है कि उत्तम क्षमा सहित दसों धर्मों का संदेश अधिक से अधिक लोगों के जीवन तक पहुंचे तथा धर्म, अहिंसा, शांति, प्रेम और मैत्री की भावना समाज एवं विश्व में प्रसारित हो।


