Tuesday, September 8, 2026

अलख नयन मंदिर नेत्र संस्थान ने कॉर्निया प्रत्यारोपण में बनाया मुकाम, 748 मरीजों को मिला लाभ

उदयपुर | शाबाश इंडिया।

देश में हर साल करीब एक करोड़ लोगों की मृत्यु होती है, लेकिन इसके मुकाबले नेत्रदान की संख्या बेहद कम है। नतीजतन, कॉर्निया संबंधी अंधता से जूझ रहे लगभग 11 लाख लोगों को आज भी रोशनी का इंतजार है। नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियां, धार्मिक मान्यताएं और जागरूकता का अभाव इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। इसी चुनौती के बीच उदयपुर स्थित अलख नयन मंदिर नेत्र संस्थान ने अब तक 748 कॉर्निया प्रत्यारोपण कर अनेक मरीजों के जीवन में रोशनी लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एल.एस. झाला के अनुसार, एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को दृष्टि मिल सकती है, लेकिन शहरों से लेकर गांवों तक इस विषय में पर्याप्त जागरूकता विकसित नहीं हो पाई है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्रदान को धार्मिक आस्थाओं और भ्रांतियों से जोड़कर देखा जाता है, जिसके कारण वहां नेत्रदान की संख्या अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी राजस्थान में अलख नयन मंदिर ऐसा प्रमुख संस्थान है, जहां कॉर्निया सर्जरी के विशेषज्ञ नियमित सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

25 अगस्त से 8 सितंबर तक चल रहे नेत्रदान पखवाड़े के दौरान संस्थान ने नेत्रदान को जनसंवाद का हिस्सा बनाने के लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित कीं। अस्पताल परिसर से लेकर मॉल और वृद्धाश्रमों तक लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, उपयोगिता और इससे जुड़े भ्रमों के बारे में जानकारी दी गई।

सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में संस्थान निदेशक लक्ष्मी झाला ने बताया कि स्वागत कक्ष, ओपीडी और चिकित्सकीय परामर्श के दौरान मरीजों एवं उनके परिजनों को पुस्तिकाओं तथा संवाद के माध्यम से नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया। सेलिब्रेशन मॉल में नेत्र जांच एवं जागरूकता शिविर लगाया गया। वहीं अस्पताल में पोस्टर प्रतियोगिता और विशेष वार्ताओं के माध्यम से भी लोगों को अभियान से जोड़ा गया।

संस्थान की मीनाक्षी चुण्डावत ने बताया कि 27 अगस्त को पूज्य ओल्ड एज होम, भुवाणा तथा 1 सितंबर को श्रीमती कृष्णा शर्मा आनंद वृद्धाश्रम, तारा संस्थान में वरिष्ठ नागरिकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पखवाड़े के दौरान अब तक करीब 30 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प भी लिया है।

कॉर्निया सर्जन डॉ. सुमित वार्ष्णेय ने बताया कि संस्थान में डीएएलके, डीएसईके और डीएमईके जैसी आधुनिक तकनीकों से कॉर्निया प्रत्यारोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही ड्राई आई, एम्ब्लायोपिया, लेसिक एवं रिफ्रेक्टिव सेवाओं के लिए भी आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं।

डॉ. क्षिती सरूपरिया ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी, आरओपी स्क्रीनिंग, विट्रियो-रेटिनल सर्जरी, ऑक्युलोप्लास्टी, स्क्विंट एवं आई ट्यूमर सर्जरी जैसी सेवाएं भी संस्थान में उपलब्ध हैं। कैटरैक्ट सर्जरी में आधुनिक आईओएल चयन और सर्जिकल प्लानिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्रदान को लेकर जागरूकता की स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं और भ्रांतियों के कारण अनेक परिवार मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए आगे नहीं आते। संस्थान का प्रयास है कि निरंतर संवाद, जागरूकता शिविरों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से इन धारणाओं को बदला जाए।

नेत्रदान अभियान को चिकित्सा शिक्षा से जोड़ते हुए 8 सितंबर को सीएमई एवं लघु कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें मेडिकल छात्र, प्रशिक्षणार्थी और नेत्र विशेषज्ञ केराटोप्लास्टी, कॉर्निया प्रत्यारोपण तथा नेत्रदान से जुड़े विषयों पर मंथन करेंगे।

संस्थान का लक्ष्य नेत्रदान को केवल पखवाड़े तक सीमित रखने के बजाय इसे समाज का स्थायी जनआंदोलन बनाना है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों तक दृष्टि की रोशनी पहुंचाने की दिशा में संस्थान लगातार प्रयासरत है।

रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar