तीर्थंकर श्रेयांसनाथ का निर्वाणोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया

जयपुर | शाबाश इंडिया।
जनकपुरी स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर परिसर में आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित तीन दिवसीय श्रमणत्व रक्षा महामहोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं वात्सल्य भाव के साथ सानंद संपन्न हुआ। महोत्सव के दौरान 700 अर्घ्य अर्पित किए गए तथा हवन कुंड में मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने यज्ञ आहुतियां दीं।
कार्यक्रम में मुनि श्री अनुकंपाचार्य जी एवं मुनि श्री विष्णु कुमार जी की पूजन-अर्चना की गई। शुक्रवार को श्रद्धालुओं द्वारा 100 अर्घ्य अर्पित किए जाने के साथ ही 700 अर्घ्य पूर्ण हुए। इसके पश्चात तीर्थंकर श्रेयांसनाथ भगवान की पूजन, निर्वाण कांड का वाचन एवं निर्वाण लाड़ू चढ़ाया गया। निर्वाण लाड़ू चढ़ाने का सौभाग्य व्रती श्रावक रमेश एवं अरविंद सखुनियां परिवार को प्राप्त हुआ। विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्रदीप मीना चांदवाड़ को प्राप्त हुआ।
हवन कुंड में श्रद्धालुओं ने धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धापूर्वक आहुतियां अर्पित करते हुए “स्वाहा-स्वाहा” के जयघोष किए। विधान के मुख्य कलश का सौभाग्य पदम, पारस एवं पहुप जैन बिलाला परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद विधान का विधिवत विसर्जन किया गया।
मुनिराजों की रक्षा एवं श्रमणत्व के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओं ने पिच्छी पर राखी बांधकर मुनि रक्षा का संकल्प लिया। संपूर्ण विधान पं. प्रकाश चंद जी द्वारा विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ने इतिहास में मुनिराजों पर हुए विभिन्न उपसर्गों एवं उनकी रक्षा के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रमण संस्कृति की रक्षा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रावक का कर्तव्य है। मुनिराजों के प्रति वात्सल्य, श्रद्धा एवं सम्मान का भाव रखते हुए उनकी रक्षा और श्रमण परंपरा के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।
तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। पूरे मंदिर परिसर में धर्म, भक्ति, वात्सल्य एवं श्रमणत्व रक्षा की भावना का वातावरण बना रहा।
पदम जैन बिलाला


