आत्मचिंतन से श्रेष्ठ जीवन की ओर बढ़ने का आह्वान

उदयपुर | शाबाश इंडिया।
वेदों की ज्ञान परंपरा, आत्मचिंतन और संस्कारों को जीवन में उतारने का संदेश देते हुए आर्य समाज हिरण मगरी का छह दिवसीय वेद प्रचार समारोह शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म पर्व के साथ संपन्न हुआ। वैदिक परंपरा में विशेष महत्व रखने वाले इस पर्व पर उपस्थित आर्यजनों ने स्वाध्याय, विद्यारंभ और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
समारोह में आर्ष विद्याकुलम बढ़ेड़ी, मुजफ्फरनगर के कुलपति आचार्य योगेश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल आजीविका अर्जित करना नहीं, बल्कि मनुष्य के चरित्र को परिष्कृत कर समाज के निर्माण में उसकी सार्थक भूमिका सुनिश्चित करना है। उन्होंने यजमानों को यज्ञोपवीत धारण के साथ वेदाध्ययन, स्वाध्याय और ज्ञान साधना का संकल्प दिलाया।
उपमंत्री भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि वैदिक काल से चली आ रही श्रावणी उपाकर्म की परंपरा ज्ञान के नवीनीकरण और आत्ममंथन का पर्व मानी जाती है। इंद्र प्रकाश वैदिक ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया। पंडित इंद्रदेव पीयूष ने रक्षाबंधन, प्रभु भक्ति और महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन संदेशों पर आधारित प्रेरक भजनों की प्रस्तुतियों से वातावरण को भावपूर्ण बनाया। विशिष्ट अतिथि के रूप में वानप्रस्थी मुनि नरेंद्र आर्य उपस्थित रहे।
आर्य समाज हिरण मगरी के प्रधान संजय शांडिल्य ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि मंत्री वेद मित्र आर्य ने आभार व्यक्त किया। सरला आर्या के शांति पाठ और जयघोष के साथ समारोह का समापन हुआ। संचालन भूपेंद्र शर्मा ने किया।
वैदिक संस्कृति के संवर्धन में योगदान के लिए आचार्य योगेश भारद्वाज, मुनि नरेंद्र आर्य, इंद्रदेव पीयूष, दीपक दांत्या, गोविंद ओड और नूतन गर्ग का मेवाड़ी पाग, शॉल, गायत्री मंत्र पट्टिका तथा पत्रम्-पुष्पम् भेंट कर अभिनंदन किया गया।
समारोह में संरक्षक प्रो. डॉ. अमृतलाल तापड़िया, शारदा गुप्ता, उपप्रधान कृष्ण कुमार सोनी, कोषाध्यक्ष रमेशचंद्र जायसवाल, योगाचार्य जिग्नेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में आर्यजन उपस्थित रहे।
रिपोर्ट/फोटो: यौवन्तराज माहेश्वरी


