Thursday, August 27, 2026

डॉ. जीवन प्रकाश जैन : ज्ञान, धर्म और युवा नेतृत्व का प्रेरणादायी व्यक्तित्व

अयोध्या | शाबाश इंडिया।

गणिनीप्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के संघस्थ शिष्य एवं अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन के 49वें जन्मदिवस पर उनके धार्मिक, शैक्षणिक, सामाजिक एवं साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने उन्हें आदर्श युवा व्यक्तित्व बतायाl

डॉ. जीवन प्रकाश जैन का जन्म 26 अगस्त 1978 को भोपाल के एक धार्मिक परिवार में हुआ। उनके पिता श्री एल.सी. जैन एवं माता श्रीमती प्रेमलता जैन हैं। उन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से गणित में एमएससी प्रथम श्रेणी से की तथा भारतीय दार्शनिक ग्रंथों में गणितीय सामग्री के विश्लेषण विषय पर पीएचडी की। इसके अलावा उन्होंने मानव संसाधन विकास में प्रबंधन पाठ्यक्रम भी पूर्ण किया।

धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में डॉ. जैन ने गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के मार्गदर्शन में विभिन्न जैन आगम एवं दार्शनिक ग्रंथों का अध्ययन किया। ब्रह्मचर्य व्रत के साथ वे लंबे समय से गणिनीप्रमुख माताजी के संघ से जुड़े हुए हैं और जैन धर्म के सिद्धांतों को तर्क एवं विज्ञान के आधार पर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

देश-विदेश में धर्मप्रभावना

डॉ. जीवन प्रकाश जैन को अमेरिका सहित विभिन्न देशों में जैन धर्म पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया। वर्ष 2007 में कैलिफोर्निया के जैन केंद्रों द्वारा दशलक्षण पर्व के अवसर पर उन्हें आमंत्रित किया गया। उन्होंने मिलपिटास, फीनिक्स, डलास और ऑरलैंडो सहित विभिन्न स्थानों पर धर्मप्रभावना की।

वर्ष 2015 में न्यूजर्सी तथा वर्ष 2022 में जैन सेंटर ऑफ नॉर्दर्न कैलिफोर्निया द्वारा उन्हें विशेष विद्वान के रूप में आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने लगातार दस दिनों तक जैन धर्म के विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। वर्ष 2024 में अटलांटा, वॉशिंगटन डीसी एवं वर्जीनिया सहित विभिन्न जैन केंद्रों में तथा वर्ष 2025 में न्यूजर्सी में भी उन्होंने धर्मप्रभावना की।

साहित्य और शोध के क्षेत्र में योगदान

डॉ. जीवन प्रकाश जैन का साहित्यिक योगदान भी उल्लेखनीय है। उन्होंने लगभग 15 हजार जैन धार्मिक शब्दों से युक्त हिंदी-अंग्रेजी भगवान महावीर जैन शब्दकोष के संकलन में सहयोग किया। इसके अलावा गणिनी ज्ञानमती गौरव ग्रंथ, पार्श्वनाथ ग्रंथ, आचार्य भारतसागर गौरव ग्रंथ एवं प्रज्ञा पुंज जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों के संपादन में भी योगदान दिया।

जैन समाज की प्रतिष्ठित पत्रिका सम्यकज्ञान के संपादक के रूप में वे वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। पीठाधीश कर्मयोगी रविंद्रकीर्ति स्वामी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित गौरविका और साहसिक व्यक्तित्व जैसे ग्रंथों के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दिगंबर जैन त्रिलोक संस्थान जम्बूद्वीप की 50 वर्षों की यात्रा को समेटती स्मारिका स्वर्णिम सोपान तथा अयोध्या के जैन धार्मिक महत्व पर आधारित महातीर्थ अयोध्या भी उनके महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यों में शामिल हैं।

शिक्षा और युवा नेतृत्व

जैन धर्म के अध्ययन को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए उन्होंने ऑनलाइन जैन अध्ययन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन कार्यक्रमों में भारत सहित विदेशों से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

डॉ. जीवन प्रकाश जैन अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में युवाओं को धर्म, संस्कृति और समाजसेवा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वे दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप हस्तिनापुर सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।

उन्हें समय-समय पर आदर्श युवा रत्न, प्रज्ञाभूषण, समाज गौरव सहित विभिन्न उपाधियों एवं सम्मानों से अलंकृत किया गया है। दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी एवं दिल्ली विधानसभा में भी उन्हें संबोधन का अवसर प्राप्त हुआ है। मांगीतुंगी में निर्मित 108 फुट भगवान आदिनाथ प्रतिमा के अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक महोत्सव में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अयोध्या और जैन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने अयोध्या के जैन धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन परंपरा में भगवान राम और सीता का भी विशेष महत्व है तथा अयोध्या जैन धर्म के पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि होने के कारण अत्यंत पवित्र तीर्थ है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का विकास जन-जन की उपलब्धि है और राम मंदिर भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान के रूप में सदैव स्थापित रहेगा।

उनका लक्ष्य जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण के साथ नई पीढ़ी और युवाओं तक पहुंचाना तथा जैन समाज की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं विकास करना है। वे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जम्बूद्वीप दर्शन जैसे उपयोगी ग्रंथों के संकलन की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।

अभिषेक अशोक पाटील ने कहा कि डॉ. जीवन प्रकाश जैन का जीवन ज्ञान, साधना, संगठन क्षमता और समाजसेवा का प्रेरक उदाहरण है। उनके जन्मदिवस पर अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद की ओर से उनके यशस्वी, उज्ज्वल, धार्मिक एवं सामाजिक कल्याणमय जीवन की मंगलकामना की गई। साथ ही उनके माता-पिता एवं गुरुजनों के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए समाज और धर्म के कार्यों में निरंतर मार्गदर्शन एवं योगदान की कामना की गई।

शब्दांकन : अभिषेक अशोक पाटील
कार्याध्यक्ष, अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar