Wednesday, August 26, 2026

उदयपुर में ज्ञान-चिंतन का राष्ट्रीय संगम, विद्वत् संगोष्ठी का भव्य समापन

उदयपुर | शाबाश इंडिया।

श्री दिगंबर जैन आदिनाथ भवन, सेक्टर-11 में 22 एवं 23 अगस्त 2026 को श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी का भव्य समापन हुआ। संगोष्ठी के चार सत्रों में ‘हितमणिमालिका’ एवं ‘प्रश्नोत्तर रत्नमालिका’ पर गहन शास्त्रीय विमर्श किया गया। देशभर से आए विद्वानों ने दोनों ग्रंथों के दार्शनिक, आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।

चारों सत्रों की अध्यक्षता क्रमशः प्रो. प्रेमसुमन जैन उदयपुर, पं. विनोद जैन रजवास, डॉ. श्रेयांस जैन बड़ौत एवं डॉ. श्रेयांस जैन ने की। वहीं संचालन पं. विनोद जैन, डॉ. पंकज जैन, डॉ. सुनील जैन संचय एवं डॉ. बाहुबली जैन इंदौर ने किया।

मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि शास्त्रों का अध्ययन तभी सार्थक है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन और आचरण में दिखाई दे। शास्त्र केवल ज्ञान संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और जीवन-परिष्कार का मार्ग हैं। उन्होंने विद्वानों के शोधपूर्ण अनुशीलन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन जैन ज्ञान परंपरा के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसके प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुनिश्री ने वर्तमान समय की अनेक विसंगतियों पर भी प्रकाश डाला।

संगोष्ठी के संयोजक पं. विनोद जैन रजवास ने सभी विद्वानों, अतिथियों, आयोजन समिति एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुनि श्री के पावन सान्निध्य और विद्वानों के सारगर्भित चिंतन से यह आयोजन ज्ञान-यज्ञ के रूप में सफल हुआ।

आयोजन में निर्देशक डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत, स्थानीय संयोजक डॉ. राजेश जैन देवड़ा, चातुर्मास अध्यक्ष श्री अशोक शाह, आदिनाथ ट्रस्ट अध्यक्ष श्री पारस जैन चित्तौड़ा, महामंत्री श्री भंवरलाल एवं संयोजक श्री महावीर सिंघवी सहित समिति सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।

संगोष्ठी में प्रो. प्रेम सुमन जैन, डॉ. ज्योतिबाबू जैन, डॉ. आशीष जैन आचार्य, डॉ. पंकज जैन शास्त्री इंदौर, डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर, डॉ. सतेंद्र जैन जयपुर, डॉ. आशीष जैन शास्त्री बम्होरी, डॉ. आशीष जैन शिक्षाचार्य दमोह, डॉ. बाहुबली जैन इंदौर, डॉ. सुमत कुमार जैन उदयपुर, पं. अंकित जैन शास्त्री मडदेवरा सहित अनेक विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

दो दिवसीय संगोष्ठी ने जैन साहित्य, दर्शन एवं आध्यात्मिक चिंतन को समर्पित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद द्वारा प्रकाशित डॉ. सुनील जैन संचय की कृति ‘अंतर्मन का आलोक’ का विमोचन भी किया गया।

— डॉ. राजेश जैन
उदयपुर

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar