
भारत! ओ मेरी पुण्य भूमि को, शत-शत बार प्रणाम है,
मेरा तेरी आन पर मिट जाने का, मन में ठाना संकल्प है।
शीश कटे पर झुके नहीं, हम उन वीरों की संतान हैं,
तेरी वेदी पर प्राण न्योछावर, यही हमारी शान है।
बिजली सी कौंधे रग-रग में, जब देश प्रेम की बात चले,
दुश्मन काँपे थर-थर देख हमें, जब वीरों की ये टोली चले।
राणा का भाला, शिवा की तलवार, याद हम दिलाएंगे,
आँच आई जो तुझ पर माता, हम सिंहनाद कर जाएंगे।
केसरिया, सफेद, हरा रंग, आन-बान-शान है,
तिरंगा हमारी धड़कन, तू हमारी जान है।
भेदभाव को भूलकर, हम सब एक कहलाते हैं,
स्वाधीनता के इस उत्सव में, मिलकर गीत गाते हैं।
भारत! ओ मेरी पुण्य भूमि को, शत-शत नमन हम करते हैं,
मेरा तेरे आँचल में बीते, जीवन का हर सवेरा।
आँख खुले तो सच हो जाए, सपनों का वो हर कोना।
डॉ. अल्पना जैन
“महाराष्ट्र गौरव”
मालेगांव, नासिक, महाराष्ट्र


