Thursday, August 13, 2026

पैंक्रियाटाइटिस: अग्न्याशय की सूजन को न करें नजरअंदाज

डां.एम.एल जैन ” मणि ”

बी एम एस(होम्योपैथी), पी.एच.डी. अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर

पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) अग्न्याशय यानी पैंक्रियास में होने वाली सूजन है। अग्न्याशय पेट के ऊपरी हिस्से में, आमाशय के पीछे स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है। यह पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम तथा रक्त में शर्करा को नियंत्रित करने वाले इंसुलिन जैसे हार्मोन बनाता है।

पैंक्रियाटाइटिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—तीव्र (Acute) और दीर्घकालिक/क्रॉनिक (Chronic) पैंक्रियाटाइटिस।

तीव्र और क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस

तीव्र पैंक्रियाटाइटिस अचानक शुरू हो सकता है और इसकी गंभीरता हल्की से लेकर गंभीर तक हो सकती है। कुछ मामलों में तत्काल अस्पताल में उपचार की आवश्यकता होती है। उचित उपचार मिलने पर कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।

क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस लंबे समय तक या बार-बार होने वाली सूजन से जुड़ा होता है। इससे अग्न्याशय को स्थायी नुकसान हो सकता है और पाचन तथा रक्त शर्करा नियंत्रण में समस्याएं हो सकती हैं। इसमें लंबे समय तक चिकित्सकीय देखभाल और नियमित निगरानी की आवश्यकता पड़ सकती है।

प्रमुख कारण

पैंक्रियाटाइटिस के सामान्य कारणों में—

  • पित्त की पथरी (Gallstones)
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • रक्त में ट्राइग्लिसराइड का बहुत अधिक बढ़ जाना
  • कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव
  • पेट में चोट
  • कुछ संक्रमण
  • रक्त में कैल्शियम का बहुत अधिक बढ़ जाना
  • अग्न्याशय या उसकी नली में रुकावट
  • कुछ आनुवंशिक कारण

शामिल हैं। कई मामलों में जांच के बावजूद स्पष्ट कारण सामने नहीं आ पाता।

प्रमुख लक्षण

पैंक्रियाटाइटिस में आमतौर पर—

  • पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द
  • दर्द का पीठ की ओर फैलना
  • भोजन के बाद दर्द बढ़ना
  • मतली और उल्टी
  • बुखार
  • पेट में भारीपन या संवेदनशीलता
  • तेज धड़कन
  • भूख कम लगना

जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस में बार-बार पेट दर्द, वजन कम होना तथा तैलीय या चिकना मल भी हो सकता है। ऐसा पाचन एंजाइमों की कमी के कारण हो सकता है।

कब तुरंत अस्पताल जाएं?

यदि अचानक तेज पेट दर्द हो, लगातार उल्टी हो, बुखार या पीलिया दिखाई दे, सांस लेने में परेशानी हो, अत्यधिक कमजोरी हो या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें। तत्काल चिकित्सकीय जांच और आवश्यकतानुसार अस्पताल में उपचार कराना जरूरी है।

जांच कैसे होती है?

डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार निम्न जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं—

  • रक्त में लिपेज और एमाइलेज
  • लिवर फंक्शन टेस्ट
  • ब्लड शुगर
  • ट्राइग्लिसराइड
  • कैल्शियम
  • पेट की सोनोग्राफी/अल्ट्रासाउंड
  • आवश्यकता के अनुसार CT स्कैन या MRI

केवल किसी एक जांच के आधार पर पैंक्रियाटाइटिस का निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक जांच और रिपोर्टों को मिलाकर निदान करते हैं।

बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

पैंक्रियाटाइटिस के जोखिम को कम करने के लिए—

  • शराब से बचें।
  • धूम्रपान न करें।
  • बहुत अधिक तला-भुना और वसायुक्त भोजन सीमित करें।
  • ट्राइग्लिसराइड और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें।
  • पित्त की पथरी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न लें।
  • बार-बार होने वाले पेट दर्द को नजरअंदाज न करें।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर मरीज को जीवनभर एक जैसा परहेज या उपचार नहीं करना पड़ता। उपचार और आहार संबंधी सलाह पैंक्रियाटाइटिस के प्रकार, कारण और मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर तय करते हैं।

होम्योपैथी के संबंध में क्या ध्यान रखें?

पैंक्रियाटाइटिस, विशेषकर तीव्र पैंक्रियाटाइटिस, में होम्योपैथी को मुख्य या आपातकालीन उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। पैंक्रियाटाइटिस की सूजन, पित्त की पथरी या अग्न्याशय को हुए नुकसान को ठीक करने में होम्योपैथिक दवाओं की प्रभावशीलता का पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इसलिए कोलोसिंथ, आइरिस वर्सिकलर, नक्स वोमिका, चेलिडोनियम या अन्य किसी होम्योपैथिक दवा का सेवन करके डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति होम्योपैथिक उपचार लेना चाहता है, तो उसे अपने चिकित्सक को इसकी जानकारी देनी चाहिए और इसे प्रमाणित चिकित्सा उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लेना चाहिए।

महत्वपूर्ण संदेश

पैंक्रियाटाइटिस के लक्षणों को हल्के में न लें। खासकर अचानक तेज पेट दर्द और लगातार उल्टी जैसी स्थिति में स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करें। यदि पित्त की पथरी, अधिक ट्राइग्लिसराइड या अन्य कोई कारण मौजूद है, तो उसका उचित उपचार भी जरूरी है।

समय पर पहचान, सही जांच और उचित चिकित्सकीय उपचार से जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है।

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