Tuesday, July 28, 2026

वीर शासन जयंती पर भगवान महावीर की प्रथम दिव्यध्वनि दिवस श्रद्धा एवं उल्लास से मनाया जाएगा

जयपुर| भगवान महावीर स्वामी की सर्वभाषामयी प्रथम दिव्यध्वनि दिवस ‘वीर शासन जयंती’ आज श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाई जाएगी। जैन परंपरा के अनुसार आज से लगभग 2583 वर्ष पूर्व श्रावण कृष्ण प्रतिपदा के पावन दिवस पर राजगृही के विपुलाचल पर्वत पर भगवान महावीर की प्रथम दिव्यध्वनि प्रकट हुई थी। इसी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक घटना के कारण यह दिवस वीर शासन जयंती के रूप में प्रसिद्ध है।

जैन मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान महावीर ने अपनी प्रथम देशना राजा श्रेणिक सहित उपस्थित विशाल जनसमुदाय को प्रदान की थी। उनकी दिव्यध्वनि 718 भाषारूपों में परिणत होकर प्रत्येक प्राणी को उसकी भाषा में धर्म का बोध कराती थी। इसमें 18 महाभाषाएँ तथा 700 लघु भाषाएँ सम्मिलित मानी गई हैं। यही कारण है कि भगवान महावीर की दिव्यध्वनि को सर्वभाषामयी कहा जाता है।

शास्त्रों में वर्णित गाथाओं के अनुसार अवसर्पिणी काल के चतुर्थ काल के अंतिम भाग में श्रावण कृष्ण प्रतिपदा, अभिजित नक्षत्र के उदयकाल में धर्मतीर्थ की स्थापना हुई। भगवान महावीर की प्रथम देशना में अहिंसा, सत्य, करुणा, संयम, अपरिग्रह तथा आत्मानुभूति का संदेश निहित था। उनके प्रथम गणधर इंद्रभूति गौतम स्वामी ने इस दिव्यध्वनि को श्रुतज्ञान के रूप में ग्रहण कर जैन आगम परंपरा की आधारशिला रखी।

भगवान महावीर ने आत्मा और शरीर के भेद का ज्ञान कराते हुए सम्यक्दर्शन, सम्यक्ज्ञान एवं सम्यक्चरित्र के मार्ग का उपदेश दिया। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे महाव्रतों के पालन के साथ अनेकांतवाद एवं सह-अस्तित्व की भावना को मानव जीवन का आधार बताया।

दिगम्बर परंपरा के अनुसार आचार्य भूतबली अंतिम ऐसे आचार्य माने जाते हैं जिन्होंने पूर्वों के ज्ञान का संरक्षण किया। बाद में दिगम्बर आचार्यों ने उपलब्ध श्रुत परंपरा के आधार पर अनेक सिद्धांत ग्रंथों की रचना कर जैन दर्शन की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखा।

भगवान महावीर ने लगभग 30 वर्षों तक दिव्यध्वनि के माध्यम से धर्मोपदेश देकर समस्त मानवता को सत्य, अहिंसा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया। उनकी अंतिम दिव्यध्वनि कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रकट हुई और उसी दिन उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया, जिसे जैन समाज वीर निर्वाण दिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाता है।

इस अवसर पर जनकपुरी ज्योतिनगर में विराजमान आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि वीर शासन जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भगवान महावीर की दिव्य देशना को जीवन में उतारने का प्रेरणापर्व है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अहिंसा, सत्य, संयम, अपरिग्रह एवं भेदविज्ञान के सिद्धांतों को आत्मसात कर आत्मकल्याण एवं विश्वशांति के मार्ग पर अग्रसर होने का आह्वान किया।

पदम जैन बिलाला
जनकपुरी, जयपुर

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