
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय में आयोजित एक दिवसीय फोटोग्राफी कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए सीख, प्रयोग और रचनात्मकता का प्रेरणादायी मंच बनी। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कैमरे की तकनीक के साथ-साथ संवेदनशील दृष्टि, रचनात्मक सोच और प्रभावी छायांकन की बारीकियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट राकेश शर्मा ‘राजदीप’ ने कहा कि श्रेष्ठ फोटोग्राफी महंगे कैमरे से नहीं, बल्कि सजग दृष्टि और संवेदनशील मन से जन्म लेती है। उन्होंने फिल्म युग से लेकर डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक फोटोग्राफी के विकासक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक प्रभावी तस्वीर बिना शब्दों के भी समाज से संवाद स्थापित कर सकती है और इतिहास को सहेजने का माध्यम बनती है।
दृश्य कला संकाय के निदेशक प्रो. हेमंत द्विवेदी ने कहा कि कलाकार की पहचान उसकी दृष्टि से होती है। फोटोग्राफी केवल दृश्य को कैद करना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे भाव, संघर्ष, सौंदर्य और सत्य को पहचानने की कला है।
विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर वशिष्ठ ने कहा कि वर्तमान समय में फोटोग्राफी पत्रकारिता, विज्ञापन, दृश्य कला, डिजिटल मीडिया और सामाजिक संचार का प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अभ्यास, अनुशासन और रचनात्मक प्रयोग को सफलता का आधार बनाने का आह्वान किया।
कार्यशाला के व्यावहारिक सत्र में राकेश शर्मा ‘राजदीप’ ने पोर्ट्रेट, स्ट्रीट, क्रिएटिव और डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफी के विभिन्न आयामों का प्रदर्शन किया। उन्होंने फ्रेमिंग, कंपोजिशन, प्रकाश, एंगल, डेप्थ, विजुअल बैलेंस तथा निर्णायक क्षण को पहचानने की तकनीकों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। विद्यार्थियों ने कैमरे के साथ अभ्यास करते हुए अपने प्रश्नों के समाधान भी प्राप्त किए।
कार्यक्रम में डॉ. शाहिद परवेज, डॉ. गौरव शर्मा, डॉ. यामिनी शर्मा, डॉ. मनीष भट्ट सहित संकाय के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपिका माली ने किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि फोटोग्राफी को देखने और समझने का नया दृष्टिकोण प्रदान करने वाला अनुभव रही। साथ ही भविष्य में ऐसे नियमित आयोजनों और प्रतिभागियों के छायाचित्रों की प्रदर्शनी आयोजित करने की भी बात कही।


