Friday, July 10, 2026

जैन मित्र मंडली ने की दार्जिलिंग, सिक्किम, गंगटोक और नेपाल की 8 दिवसीय आनंददायक यात्रा

जयपुर। शाबाश इंडिया

झोटवाड़ा जैन समाज की मित्र मंडली द्वारा दार्जिलिंग, सिक्किम, गंगटोक और नेपाल की 8 दिवसीय मनोरंजन एवं धार्मिक यात्रा आनंदपूर्वक संपन्न की गई। यात्रा में सदस्यों ने प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक स्थानों का भ्रमण कर यादगार अनुभव प्राप्त किए।

झोटवाड़ा जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष एवं जैन सोशल ग्रुप सिद्धा परिवार के संस्थापक अध्यक्ष धीरज कुमार पाटनी ने बताया कि यात्रा का शुभारंभ 1 जुलाई को प्रभु श्री पार्श्वनाथ भगवान के अभिषेक, पूजा एवं दर्शन के साथ हुआ। इसके बाद सभी यात्री प्रातः लगभग 5:45 बजे जयपुर से कार द्वारा दिल्ली के लिए रवाना हुए। दिल्ली से हवाई मार्ग द्वारा लगभग सवा दो घंटे की यात्रा के बाद सभी बागडोगरा पहुंचे, जहां से कार द्वारा खूबसूरत पहाड़ी रास्तों का आनंद लेते हुए शाम को दार्जिलिंग पहुंचे।

दार्जिलिंग में प्रसिद्ध जंबाला रिजॉर्ट्स में ठहरने के बाद यात्रियों ने वहां के प्राकृतिक सौंदर्य, चाय के बागानों, हरियाली और मनमोहक दृश्यों का आनंद लिया। यात्रा के दौरान नेपाल बॉर्डर पार कर नेपाल में भी भ्रमण किया गया, जहां बुद्ध मंदिर के दर्शन किए गए।

यात्रा के दौरान प्रातः 4:15 बजे प्रसिद्ध टाइगर हिल पहुंचकर सूर्योदय का अद्भुत नजारा देखा गया। यात्रियों ने कंचनजंगा पर्वत की स्वर्णिम आभा का भी आनंद लिया। दार्जिलिंग की माल रोड की चहल-पहल, रोशनी और खूबसूरत वातावरण ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके बाद मित्र मंडली ने सिक्किम के गंगटोक की यात्रा की। वहां प्रसिद्ध एमजी रोड पर भ्रमण कर शहर की सुंदरता का आनंद लिया। अगले दिन भारत-चीन सीमा स्थित नाथुला बॉर्डर का भ्रमण किया गया। यात्रियों को चीन की सीमा क्षेत्र को देखने का अवसर भी मिला। इस प्रकार यात्रा के दौरान नेपाल और चीन सीमा क्षेत्र के अनुभव भी प्राप्त हुए।

नाथुला में यात्रियों ने बाबा हरभजन सिंह मंदिर के दर्शन किए तथा भारतीय सैनिकों के साथ भोजन करने का सौभाग्य प्राप्त किया। लगभग 14 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर यात्रियों ने बादलों से ऊपर होने जैसा अद्भुत अनुभव महसूस किया।

गंगटोक भ्रमण के दौरान सदस्यों ने खूबसूरत झरनों, पहाड़ों और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लिया। हिमालय की गोद में बसे इन क्षेत्रों की हरियाली और मनमोहक वातावरण ने सभी को आकर्षित किया।

यात्रा के अंतिम चरण में 7 जुलाई को सभी यात्री सिलीगुड़ी पहुंचे, जहां श्री दिगंबर जैन मंदिर एवं तेरापंथ धर्मशाला में ठहराव किया। यहां आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 अर्चित सागर जी महाराज के दर्शन किए। अष्टमी के शुभ अवसर पर मंदिर में अभिषेक एवं पूजा-अर्चना भी की गई।

इसके बाद सभी यात्री हवाई मार्ग से दिल्ली पहुंचे और कार द्वारा सकुशल जयपुर लौटे। यात्रा में शामिल सभी सदस्यों ने इसे आनंद, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर अविस्मरणीय अनुभव बताया।

यात्रा में धीरज कुमार पाटनी, सीमा पाटनी, निर्मल तारा पांड्या, मुकेश नीलम सेठी, मुकेश आशा पाटनी सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया। जयपुर पहुंचने पर सभी यात्रियों ने एक-दूसरे का जय जिनेंद्र कहकर अभिवादन किया और भविष्य में पुनः साथ यात्रा करने का संकल्प लिया।

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