जयपुर। शाबाश इंडिया।

नेमी सागर कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन देते हुए आर्यिका विष्णुमति माताजी ने कहा कि मंदिर में प्रवेश करते समय मनुष्य को सभी कषायों का त्याग कर शुद्ध भावों के साथ भगवान की आराधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान के समक्ष भी क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषाय करने से तीव्र कर्मों का बंधन होता है।
इस अवसर पर आर्यिका सुकाव्यमति माताजी ने कहा कि वीतराग भगवान की भक्ति और आराधना से ही जीवन में सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म मार्ग पर चलते हुए आत्मकल्याण के लिए प्रयास करने का संदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि आर्यिका संघ का प्रवास वर्तमान में नेमी सागर कॉलोनी में चल रहा है। इससे पूर्व आर्यिका संघ का मानसरोवर से विहार कर नेमी सागर कॉलोनी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस दौरान बैंड-बाजे और जुलूस के साथ श्रद्धालुओं ने आर्यिका संघ का स्वागत किया।
श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष जे.के. जैन कालाडेरा ने बताया कि मंगल प्रवेश अवसर पर श्रीमती लक्ष्मी बगड़ा द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। टी.सी. जैन एवं सुलोचना जैन द्वारा शास्त्र भेंट किए गए, जबकि श्रीमती बुलबुल देवी गंगवाल ने पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया।
प्रातःकाल आर्यिका संघ के सान्निध्य में नेमी सागर दिगंबर जैन मंदिर में विश्व शांति एवं समस्त प्राणियों के मंगल की कामना को लेकर शांतिधारा का आयोजन किया गया। दिन में स्वाध्याय एवं सायंकाल आनंद यात्रा का आयोजन हुआ, जिसमें समाज के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।


