जयपुर | शाबाश इंडिया

सेठी कॉलोनी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न जिनदेवी माताजी ने कहा कि घर से किसी भी शुभ कार्य के लिए निकलते समय माता-पिता, दादा-दादी, गुरुजन एवं परिवार के बड़े सदस्यों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना भारतीय संस्कृति का महान संस्कार है। उन्होंने कहा कि यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि विनम्रता, कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है।
आचार्य रत्न बाहुबली महाराज की पट्टशिष्या गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न जिनदेवी माताजी ने कहा कि जब व्यक्ति बड़ों के चरण स्पर्श करता है तो उसका अहंकार समाप्त होता है और संस्कार जागृत होते हैं। बड़ों का आशीर्वाद आत्मविश्वास, सकारात्मकता और शुभ भावों का संचार करता है। उनके अनुभव और शुभकामनाएं जीवन में अदृश्य शक्ति के रूप में कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में बड़ों का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास रहता है।
उन्होंने कहा कि विनय से ज्ञान की प्राप्ति होती है, संबंधों में मधुरता आती है और जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। जो व्यक्ति अपने से बड़े लोगों का सम्मान करना जानता है, वही समाज में भी सम्मान का अधिकारी बनता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन बड़ों का आशीर्वाद लेकर घर से निकलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि यही संस्कार आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
धर्मसभा का समापन जिनवाणी स्तुति के साथ हुआ।
राजस्थान जैन युवा महासभा, जयपुर के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि प्रातःकाल मूलनायक भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। इसके बाद चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन तथा श्रद्धालुओं द्वारा पूज्या माताजी का पाद प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की गई।
मंदिर समिति के अध्यक्ष दीनदयाल पाटनी, महामंत्री धर्मीचंद कासलीवाल एवं राकेश मुशर्रफ ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व के अवसर पर 21 से 29 जुलाई तक पूज्या माताजी के सान्निध्य में श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, सेठी कॉलोनी में मंदिर प्रबंधकारिणी समिति एवं श्री सन्मति महिला मंडल के तत्वावधान में श्री 1008 इन्द्रध्वज महामंडल विधान पूजा का भव्य आयोजन किया जाएगा।
इसी क्रम में शुक्रवार को इन्द्रध्वज विधान के प्रमुख पात्रों का चयन किया गया। इसमें सुनील सेठी एवं कनिका सेठी को सौधर्म इन्द्र, अशोक सोगानी एवं सुषमा सोगानी को कुबेर इन्द्र, पदमचंद बैनाडा एवं मालती बैनाडा को यज्ञनायक तथा अनिल जैन एवं कविता जैन को ईशान इन्द्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।


