गुना | शाबाश इंडिया

पुण्योदय तीर्थ, बजरंगगढ़ में प्रतिष्ठा के बाद नवीन वेदिकाओं पर भगवान की स्थापना के उपरांत महा मस्तिष्काभिषेक एवं महाशांति धारा का भव्य आयोजन किया गया। यह अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के वृहद मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने धार्मिक भाव से सहभागिता की।
इस अवसर पर परम पूज्य राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में भगवान की वेदिकाओं पर प्रतिष्ठा कर उन्हें विराजमान किया गया। इसके पश्चात मुनिश्री के मुख से वृहद मंत्रोच्चार के साथ महा मस्तिष्काभिषेक एवं जगत कल्याण की कामना हेतु महाशांति धारा सम्पन्न हुई। कार्यक्रम के दौरान छत्र, चावर एवं महामंडल अर्पित किए गए।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में सत्य और सभ्यता दोनों का संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल सत्य नहीं, बल्कि व्यवहार में सभ्यता का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि सामाजिक जीवन में विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना से ही व्यक्ति का जीवन सफल और सुखद बनता है।
मुनिश्री ने आगे कहा कि व्यक्ति को अपने कर्मों का श्रेय स्वयं लेने के बजाय विनम्रता के साथ दूसरों को सम्मान देना चाहिए, जिससे समाज में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है। उन्होंने कहा कि पुण्य और पाप के भेद को समझना आवश्यक है, क्योंकि दोनों के परिणाम अलग-अलग होते हैं और जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि 13 वर्ष पूर्व लगाया गया पौधा आज विशाल वृक्ष का रूप लेकर समाज के सामने खड़ा है। उन्होंने कहा कि तीर्थ का विकास समिति के अथक परिश्रम का परिणाम है।
कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष एस. के. जैन, महामंत्री प्रदीप जैन (एडवोकेट), कोषाध्यक्ष संजीव बगुल्या सहित अन्य पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का सम्मान किया।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण एवं मंत्रोच्चार से क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।


