शाबाश इंडिया | भीलवाड़ा।

साधना से सफलता और सफलता से सिद्धि प्राप्त होती है—यह आत्मविकास का मूल सिद्धांत है। यह विचार श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी महाराज ने मंगलवार को बापूनगर स्थित महावीर भवन में दो दिवसीय प्रवास के दौरान आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि साधना का सतत अभ्यास, समय का नियोजन और आत्मचिंतन ही व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।
युवाचार्यश्री ने कहा कि आज का मनुष्य बाहरी सुविधाओं और मानसिक उलझनों के बीच स्वयं के भीतर झांकने का अवसर खो रहा है। उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य की स्थिति उस व्यक्ति जैसी हो गई है जो बार-बार घर के भीतर और बाहर आता-जाता रहता है, परंतु उसे यह समझ नहीं आता कि उसे वास्तविक शांति कहां मिलेगी। उन्होंने कहा कि वास्तविक शांति बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि आत्मसाधना और आत्मचिंतन में निहित है।
उन्होंने कहा कि साधक वही है जो स्वयं को साधने का पुरुषार्थ करता है। सामायिक, जप, तप, स्वाध्याय और संयम जैसे प्रयास साधना के स्वरूप हैं। जिस प्रकार घोड़े की सवारी वही कर सकता है जो उसे साध लेता है, उसी प्रकार जीवन में सफलता वही प्राप्त करता है जो अपने मन, विचार और व्यवहार को अनुशासित करता है।
युवाचार्यश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का आत्मलेखा-जोखा रखना चाहिए, ठीक उसी प्रकार जैसे एक व्यापारी अपने व्यवसाय का हिसाब रखता है। आत्मनिरीक्षण के बिना न साधना आगे बढ़ती है और न ही जीवन को सही दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप—इन चारों धर्मों में किए गए पुरुषार्थ का नियमित मूल्यांकन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि केवल धर्म प्राप्त करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना वास्तविक साधना है। श्रद्धा से किया गया णमोकार महामंत्र का जप भी आत्मोन्नति का प्रभावी माध्यम है।
समय के महत्व पर जोर देते हुए युवाचार्यश्री ने कहा कि समय जीवन की सबसे अमूल्य निधि है, जिसका सदुपयोग आवश्यक है। केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका समयबद्ध क्रियान्वयन ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस अवसर पर हितमित भाषी हितेन्द्र ऋषि जी ने भी कहा कि समय का एक क्षण भी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए और धर्म, साधना एवं पुरुषार्थ में निरंतर लगे रहना ही जीवन को सार्थक बनाता है।
शांतिभवन अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद चीपड़ ने बताया कि दो दिवसीय प्रवास के समापन पर श्रीसंघ के पदाधिकारियों एवं श्रावक-श्राविकाओं ने युवाचार्यश्री के समक्ष क्षमायाचना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही आगामी चातुर्मास में अधिकाधिक धार्मिक सहभागिता का संकल्प लिया गया।
उन्होंने बताया कि बुधवार को युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी महाराज एवं संतवृंद का विहार अनुकम्पा स्काई डेक के पीछे स्थित क्षेत्र के लिए होगा, जहां एक दिवसीय प्रवास रहेगा। इसके पश्चात 2 एवं 3 जुलाई को कांचीपुरम तथा 4 जुलाई को बसंत विहार में धर्मसभा एवं प्रवचन कार्यक्रम आयोजित होंगे।


