Friday, October 30, 2026

हाइपोग्लाइसीमिया: जब अचानक कम हो जाता है ब्लड शुगर, जानिए लक्षण, कारण, जाँच और बचाव के उपाय

विशेष आलेख | शाबाश इंडिया।

डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’

हाइपोग्लाइसीमिया वह स्थिति है, जिसमें रक्त में ग्लूकोज (ब्लड शुगर) का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। ग्लूकोज शरीर और विशेष रूप से मस्तिष्क के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। जब शुगर बहुत कम हो जाती है, तो चक्कर आना, पसीना आना, कमजोरी, भ्रम और गंभीर स्थिति में बेहोशी या दौरे पड़ सकते हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में इंसुलिन या कुछ शुगर कम करने वाली दवाओं के कारण हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। हालांकि, बिना डायबिटीज वाले लोगों में भी यह समस्या हो सकती है। कई बार व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि उसका शुगर लेवल सामान्य से कम हो रहा है और अचानक गंभीर स्थिति बन जाती है।

ब्लड शुगर का स्तर

सामान्यतः 70 mg/dL से कम ब्लड शुगर को चेतावनी का स्तर माना जाता है। डायबिटीज के मरीजों में 54 mg/dL से कम शुगर का स्तर अधिक गंभीर निम्न रक्त शर्करा की स्थिति दर्शाता है।

हाइपोग्लाइसीमिया के प्रमुख लक्षण

शुरुआती लक्षण:

  • अचानक तेज भूख लगना।
  • बहुत अधिक पसीना आना।
  • हाथ-पैर कांपना।
  • दिल की धड़कन तेज होना।
  • चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना।
  • बेचैनी या घबराहट होना।

गंभीर लक्षण:

  • ध्यान लगाने में कठिनाई होना।
  • भ्रम या असामान्य व्यवहार करना।
  • बोलने या देखने में परेशानी होना।
  • अत्यधिक सुस्ती महसूस होना।
  • बेहोशी या दौरे पड़ना।

कुछ लोगों में शुगर कम होने पर स्पष्ट चेतावनी वाले लक्षण नहीं दिखाई देते। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर हाइपोग्लाइसीमिया का निदान नहीं करना चाहिए।

हाइपोग्लाइसीमिया के प्रमुख कारण

  • डायबिटीज की दवाएँ: इंसुलिन या कुछ अन्य शुगर कम करने वाली दवाओं का अधिक प्रभाव होना।
  • भोजन में देरी: खाना छोड़ना, देर से खाना या पर्याप्त भोजन न करना। उपवास के दौरान भी जोखिम बढ़ सकता है।
  • अधिक शारीरिक गतिविधि: व्यायाम या मेहनत के अनुसार पर्याप्त भोजन और ऊर्जा न लेना।
  • शराब का सेवन: विशेषकर खाली पेट शराब पीने से शुगर कम होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • अन्य बीमारियाँ: लिवर, किडनी या कुछ गंभीर बीमारियाँ।
  • हार्मोन संबंधी समस्याएँ: एड्रिनल ग्रंथि या अन्य हार्मोन की कमी।
  • भोजन के बाद शुगर गिरना: कुछ लोगों में भोजन के बाद रिएक्टिव हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है।
  • दुर्लभ कारण: अग्न्याशय में इंसुलिन बनाने वाला ट्यूमर या अन्य असामान्य स्थितियाँ।

हाइपोग्लाइसीमिया के प्रकार और स्तर

डायबिटीज में हाइपोग्लाइसीमिया को मुख्यतः निम्न स्तरों में बाँटा जाता है:

प्रकारब्लड शुगर का स्तर
लेवल 1 (चेतावनी स्तर)70 mg/dL से कम और 54 mg/dL या उससे अधिक
लेवल 2 (गंभीर रूप से कम)54 mg/dL से कम
लेवल 3 (गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया)मानसिक या शारीरिक स्थिति इतनी प्रभावित होना कि दूसरे व्यक्ति की सहायता आवश्यक हो

इसके अलावा कुछ विशेष स्थितियाँ भी होती हैं:

  • रात्रिकालीन हाइपोग्लाइसीमिया: सोते समय ब्लड शुगर का कम होना।
  • रिएक्टिव हाइपोग्लाइसीमिया: भोजन करने के बाद ब्लड शुगर का कम होना।

ध्यान रखें कि ये वर्गीकरण मुख्यतः डायबिटीज के मरीजों में उपयोग किए जाते हैं। बिना डायबिटीज वाले व्यक्ति में बार-बार शुगर कम होने की स्थिति का चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।

हाइपोग्लाइसीमिया की जाँचें

1. ब्लड ग्लूकोज टेस्ट:
ग्लूकोमीटर से तुरंत ब्लड शुगर की जाँच की जा सकती है। लक्षण होने पर तुरंत जाँच करना उपयोगी है।

2. प्रयोगशाला में प्लाज्मा ग्लूकोज:
विशेष रूप से बिना डायबिटीज वाले व्यक्ति में कम शुगर की पुष्टि करने के लिए यह जाँच उपयोगी है।

3. सीजीएम (कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग):
इसमें सेंसर की मदद से दिन और रात में ग्लूकोज के उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर रखी जा सकती है।

डॉक्टर जरूरत के अनुसार कुछ अन्य जाँचें भी करा सकते हैं:

  • HbA1c: पिछले लगभग 2–3 महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का आकलन करने के लिए। यह अकेले हाइपोग्लाइसीमिया की पुष्टि नहीं करता।
  • इंसुलिन और सी-पेप्टाइड: शरीर में इंसुलिन बनने और उसके स्तर का आकलन करने के लिए।
  • लिवर और किडनी की जाँच: इन अंगों की कार्यक्षमता जानने के लिए।
  • हार्मोन संबंधी जाँच: आवश्यकता के अनुसार।
  • विशेष परीक्षण: भोजन के बाद शुगर कम होने की शिकायत पर चिकित्सकीय निगरानी में परीक्षण किए जा सकते हैं।

बचाव और सावधानियाँ

  • समय पर भोजन करें और खाना छोड़ने से बचें।
  • बार-बार शुगर कम होने की समस्या हो तो बिना चिकित्सकीय सलाह उपवास न करें।
  • डायबिटीज की दवाएँ डॉक्टर के निर्देशानुसार लें।
  • इंसुलिन या दवाओं की खुराक स्वयं न बदलें।
  • व्यायाम से पहले और बाद में जरूरत के अनुसार शुगर की जाँच करें।
  • ग्लूकोज टैबलेट या जल्दी असर करने वाले कार्बोहाइड्रेट अपने पास रखें।
  • बार-बार शुगर कम होने पर डॉक्टर से दवाओं और भोजन के समय की समीक्षा कराएँ।
  • रात में शुगर कम होने की समस्या हो तो डॉक्टर से सीजीएम की उपयोगिता पर चर्चा करें।
  • शराब से बचें, विशेषकर यदि ऐसी दवाएँ लेते हैं जिनसे शुगर कम हो सकती है।

शुगर अचानक कम हो जाए तो क्या करें?

यदि व्यक्ति होश में है और सुरक्षित रूप से निगल सकता है, तो 15-15 नियम अपनाएँ:

  1. लगभग 15 ग्राम जल्दी असर करने वाला ग्लूकोज या कार्बोहाइड्रेट दें। जैसे ग्लूकोज टैबलेट, लगभग आधा कप सामान्य फलों का जूस या चीनी मिला पानी।
  2. 15 मिनट बाद दोबारा ब्लड शुगर जाँचें।
  3. यदि शुगर अब भी 70 mg/dL से कम है, तो यही प्रक्रिया दोबारा दोहराएँ।
  4. शुगर सामान्य होने पर जरूरत के अनुसार भोजन या हल्का नाश्ता लें।

आपातकालीन स्थिति में क्या करें?

यदि व्यक्ति बेहोश है, उसे दौरे पड़ रहे हैं या वह निगलने में सक्षम नहीं है, तो उसके मुँह में पानी, चीनी, जूस या कोई भोजन बिल्कुल न डालें। उसे करवट से लिटाएँ और भारत में तुरंत 112 या स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से सहायता लें।

यदि ग्लूकागॉन उपलब्ध है और डॉक्टर ने इसके उपयोग के निर्देश दिए हैं, तो प्रशिक्षित व्यक्ति उसका उपयोग कर सकता है।

हाइपोग्लाइसीमिया में होम्योपैथिक उपचार

हाइपोग्लाइसीमिया के उपचार में किसी भी होम्योपैथिक दवा की प्रभावशीलता के पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी कोई प्रमाणित होम्योपैथिक दवा नहीं है, जो अचानक गिरती हुई ब्लड शुगर को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से सामान्य कर सके।

महत्त्वपूर्ण सावधानियाँ:

  • हाइपोग्लाइसीमिया की आपातकालीन स्थिति में होम्योपैथिक दवाओं पर निर्भर न रहें।
  • होम्योपैथिक औषधि के कारण इंसुलिन या डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएँ बंद न करें।
  • बार-बार कमजोरी, पसीना, घबराहट या चक्कर आने पर ब्लड शुगर की जाँच कराएँ और वास्तविक कारण का पता लगाएँ।
  • बिना डायबिटीज के बार-बार शुगर कम हो रही हो, तो चिकित्सक से जाँच कराएँ। इसके पीछे अन्य बीमारियाँ भी हो सकती हैं।

होम्योपैथिक चिकित्सा के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लिया जा सकता है, लेकिन इसे हाइपोग्लाइसीमिया के प्रमाणित उपचार या अचानक कम हुई शुगर को बढ़ाने के भरोसेमंद विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए।

निष्कर्ष

हाइपोग्लाइसीमिया ऐसी स्थिति है, जिसका समय पर पता लगाना और तुरंत उपचार करना बेहद जरूरी है। सही खानपान, नियमित निगरानी, दवाओं की उचित समीक्षा और आपातकालीन स्थिति में सही कदम उठाने की जानकारी से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।

डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’
एम.ए., बी.एम.एस. (होम्योपैथिक), पीएच.डी.
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य, होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर।
मोबाइल: 8949032693

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar