
विशेष आलेख | शाबाश इंडिया।
रचनाकार : इंजी. अरुण कुमार जैन
हिमगिरि से गंगासागर तक, यशगाथा जिनकी गाता,
राजकोट से मिजोरम तक, जन-जन के मन को भाता।
बिखरे-छितरे माँ के आँचल को, जिसने एक कराया,
पाँच सौ से अधिक रियासतों को मिलाकर, भारत राष्ट्र बनाया।
लौहपुरुष सरदार, राष्ट्र-ललाट के चंदन हैं,
भारत माँ के दिव्य सपूत को, शत-शत वंदन है।
डेढ़ सौ वर्ष हुए, करमसद मुस्काया,
नडियाद की धरती पर अनुपम रत्न जो आया।
शिक्षा-संस्कार पाकर, आगे कदम बढ़ाया,
विलायत जाकर बैरिस्टर का पद भी पाया।
बारडोली के कृषकों को आकर दिया सहारा,
किसानों के संघर्ष ने अन्याय को ललकारा।
गांधीजी के साथ चले, जनसेवा का व्रत था,
संयम, दृढ़ता और समर्पण ही जीवन-पथ था।
अदालत में बहस चल रही थी, तभी तार आया,
जीवनसंगिनी के निधन का संदेश जो लाया।
किंचित भी विचलित नहीं हुए, बहस रही जारी,
कर्तव्य के आगे मन के भावों पर पड़ी जिम्मेदारी।
लौहपुरुष सरदार बने भारत के महानायक,
प्रधानमंत्री पद की चाह नहीं, राष्ट्रहित के थे साधक।
खंड-खंड भारत को एक सूत्र में पिरोया,
भोपाल, जोधपुर, हैदराबाद को भारत से जोड़ा।
कश्मीर और जूनागढ़ की चुनौती को सुलझाया,
लौहपुरुष की दृढ़ता ने एकता का गौरव बढ़ाया।
सादा जीवन, सादे वस्त्र, न आभूषणों का मोह,
माँ भारती के श्रेष्ठ रत्न में था अद्भुत तेज और ओज।
15 दिसंबर, 1950 का वह दुर्दिन आया,
भारत माँ के इस सपूत ने जग से विदा लिया।
देश ने खोया अपना अनमोल सहारा,
शोक में डूबा भारत, छाया अंधियारा।
जन्मदिवस पर कोटि नमन, वंदन स्वीकारें,
हर घर में जन्में लौहपुरुष, हम सब यही पुकारें।
विश्वगुरु बने भारत, युगनायक बन जाए,
सरदार पटेल के आदर्शों से देश जगमगाए।
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