
जयपुर | शाबाश इंडिया।
श्री दिगम्बर जैन महिला महासमिति की राष्ट्रीय अध्यक्षा एवं श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के बालिका छात्रावास की अधिष्ठात्री व्रती श्राविका श्रेष्ठी श्रीमती शीला ड्योडा को इंदौर में आयोजित 31वें राष्ट्रीय महिला अधिवेशन में ‘माँ’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस भव्य अधिवेशन में उन्हें वात्सल्यमयी सेवाओं, समर्पण और आत्मीयता के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान से जयपुर सहित समूचे राजस्थान के जैन समाज का गौरव बढ़ा है।
अधिवेशन में उपस्थित डॉ. वंदना जैन, शालिनी बाकलीवाल, प्रियंका चाँदवाड़ एवं दीपिका बिलाला ने बताया कि इस राष्ट्रीय आयोजन में महिला महासमिति के 100 से अधिक संभागों से लगभग 4,500 से 5,000 महिलाओं ने सहभागिता की। इतने विशाल आयोजन में श्रीमती ड्योडा को ‘माँ’ की उपाधि से सम्मानित किया जाना उनके वात्सल्य, सेवाभाव और समाज के प्रति समर्पण का विशेष सम्मान है।
जयपुर आगमन पर श्रीमती शीला ड्योडा को विभिन्न जैन संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं समाजबंधुओं ने बधाई और शुभकामनाएँ दीं। इनमें श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के अध्यक्ष एस.के. जैन, कार्याध्यक्ष प्रमोद पहाड़िया, राजस्थान जैन सभा के महामंत्री मनीष बैद, राजस्थान जैन युवा महासभा के अध्यक्ष प्रदीप लाला एवं महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा, अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान के राजस्थान प्रांतीय अध्यक्ष पदम जैन बिलाला तथा कोषाध्यक्ष पंकज लुहाड़िया सहित अन्य गणमान्यजन शामिल रहे।
इस अवसर पर समाजबंधुओं ने कहा कि श्रीमती शीला ड्योडा ने अपनी वात्सल्यमयी सेवाओं, निष्ठा और समर्पण से न केवल जयपुर, बल्कि पूरे राजस्थान के जैन समाज का मान बढ़ाया है। उनका सेवाभाव समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
उल्लेखनीय है कि श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के बालक-बालिकाएँ और छात्रावास का समस्त स्टाफ श्रीमती शीला ड्योडा को लंबे समय से स्नेहपूर्वक ‘माँ’ कहकर संबोधित करते आ रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय महिला अधिवेशन में उन्हें औपचारिक रूप से ‘माँ’ की उपाधि से सम्मानित किया जाना उनके वर्षों के वात्सल्य, आत्मीयता और सेवा-साधना की सच्ची पहचान है।
पदम जैन बिलाला


