
लाडनूं | शाबाश इंडिया।
जैन विश्व भारती संस्थान में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में अहिंसा एवं शांति विभाग की ओर से पर्युषण महापर्व 2026 के सातवें दिन ध्यान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने ध्यान, मंत्र-जाप और आत्मचिंतन के माध्यम से पर्युषण पर्व के आध्यात्मिक महत्व को समझा।
कार्यक्रम की शुरुआत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन ने की। उन्होंने पर्युषण महापर्व से जुड़े जप दिवस के बारे में जानकारी देते हुए सभागार में उपस्थित संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को ‘अर्हम’ मंत्र का जाप करवाया। इसके बाद छात्रा मीनल पारीक और प्रियंका भंसाली ने प्रेक्षा ध्यान गीत प्रस्तुत किया।
योग एवं जीवन विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. हेमलता जोशी ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को ध्यान करवाया। उन्होंने विभिन्न ध्यान अभ्यास कराए और कायोत्सर्ग यानी शरीर को विश्राम देने की प्रक्रिया के माध्यम से ध्यान की शुरुआत की।
सहायक आचार्य भाविका जोशी ने जीवन में ध्यान के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मानसिक शांति एकाग्रता के लिए आवश्यक है और नियमित ध्यान तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को रोजमर्रा की जिंदगी में ध्यान को शामिल करने तथा नियमित अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया।
विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने आगामी संवत्सरी महापर्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को पर्व के अवसर पर विभिन्न नियमों का पालन करने के संकल्प दिलाए। इनमें उपवास, दिन में एक बार भोजन करना, जमीनकंद का सेवन नहीं करना, रात्रि भोजन का त्याग तथा अपनी स्वेच्छा से दिन में अधिकतम 15 पदार्थों के सेवन का संकल्प शामिल रहा।
कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बलबीर सिंह ने किया। इस अवसर पर संस्थान के ओएसडी प्रो. अशोक जैतावत, योग एवं जीवन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. युवराज सिंह खंगारोत, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य एवं करीब 200 विद्यार्थी उपस्थित रहे।


