Sunday, September 6, 2026

सुबोध पब्लिक स्कूल में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व

जयपुर | शाबाश इंडिया।

सुबोध पब्लिक स्कूल, एयरपोर्ट, सांगानेर में 3 सितंबर 2026 को विद्यालय परिसर में आयोजित विषय-आधारित विशेष प्रार्थना सभा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व अपार श्रद्धा, भक्ति एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं शिक्षाओं से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा शाश्वत जीवन-मूल्यों से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती आशी श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलमय वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा एवं आरती के साथ हुआ। प्रधानाचार्या ने भगवान श्रीकृष्ण का पूजन एवं आरती कर संपूर्ण विद्यालय परिवार के लिए मंगल एवं दिव्य आशीर्वाद की कामना की।

विशेष प्रार्थना सभा में सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में ‘प्रबंधन गुरु के रूप में भगवान श्रीकृष्ण’ विषय पर प्रस्तुत ज्ञानवर्धक वक्तव्य तथा श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का सस्वर वाचन एवं उनके भावार्थ की व्याख्या शामिल रही। इन प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों को ज्ञान और प्रेरणा से अभिभूत किया।

उत्सव में मासूमियत और आकर्षण का रंग भरते हुए फाउंडेशन विंग के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने मनमोहक ‘म्यूजिकल स्टैच्यू’ गतिविधि में भाग लिया। विद्यार्थियों ने ‘नटखट कान्हा’ तथा ‘बांसुरी बजाते कान्हा’ की मनोहारी मुद्राएं प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।

कक्षा I एवं II के विद्यार्थियों ने मधुर श्रीकृष्ण भजन की मनोहारी प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में विद्यार्थियों ने जीवंत नृत्य प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कक्षा VI से VIII के विद्यार्थियों ने शास्त्रीय रागों पर आधारित भजनों की सुंदर मेडली प्रस्तुत कर वातावरण को शांत, सुरम्य एवं भक्तिमय बना दिया। इसके साथ ही विद्यार्थियों की भावपूर्ण सामूहिक प्रस्तुति ‘गोविंद बोलो, हरि गोपाल बोलो’ ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

यह भव्य एवं भक्तिमय आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने के साथ-साथ उनमें भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता, श्रद्धा एवं उत्सवधर्मिता की भावना को भी सुदृढ़ किया।

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