Sunday, October 18, 2026

श्रमण संस्कृति संस्थान का 31वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न

सांगानेर | शाबाश इंडिया।

श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर, जयपुर का 30 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पूर्ण होने पर 31वां स्थापना दिवस समारोह प्रातः संस्थान के विद्या सुधा मंडप में अत्यंत भव्य, गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्थान के नवीनीकृत कार्यालय तथा भामाशाहों के पुण्यार्जन से निर्मित 15 कक्षों का भव्य लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम में सर्वप्रथम संस्थान के संप्रेरक पूज्य गुरुदेव 108 श्री सुधासागर जी महाराज का स्मरण किया गया। मुख्य अतिथि समाज के प्रमुख भामाशाह श्री अशोक जी पाटनी एवं श्रीमती सुशीला जी पाटनी रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री विवेक जी काला उपस्थित रहे। समारोह प्रातः 9 बजे प्रारंभ होकर दोपहर 12:30 बजे तक चला।

मुख्य अतिथि श्री अशोक जी पाटनी ने संस्थान के प्रति अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, “संस्थान हमारे हृदय में बसता है, इसलिए हम सदैव संस्थान की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।” उन्होंने कहा कि श्रमण संस्कृति संस्थान का निर्माण केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए एक अमूल्य धरोहर का निर्माण है।

स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान की विकास यात्रा में योगदान देने वाले सभी पूर्व पदाधिकारियों, वर्तमान प्रबंध तंत्र एवं प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले महानुभावों का स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। संस्थान के भव्य निर्माण एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली निर्माण समिति के प्रमुख एवं कार्याध्यक्ष श्री प्रमोद जी पहाड़िया तथा संयुक्त मंत्री श्री दर्शन जी वाकलीवाल के योगदान के लिए विशेष आभार व्यक्त किया गया।

संस्थान के कार्यालयों के नवीनीकरण एवं सौंदर्यीकरण में श्री विनोद जी छाबड़ा (मोनू भैया) के अथक पुरुषार्थ एवं नई सोच की भी सराहना की गई। उनके प्रयासों से संस्थान के कार्यालयों को नई भव्यता एवं आकर्षक स्वरूप प्राप्त हुआ।

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि संस्थान के विकास में अनेक महानुभावों ने निस्वार्थ भाव से अपना समय, श्रम, सहयोग एवं संसाधन समर्पित किए हैं। इन्हीं सामूहिक प्रयासों का परिणाम है कि संस्थान आज श्रमण संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

संस्थान के अधिष्ठाता डॉ. जयकुमार जी जैन, अध्यक्ष श्री शान्ति कुमार जी जैन एवं कोषाध्यक्ष श्री ऋषभ जी जैन अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हो सके। उनका आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं संस्थान परिवार को प्राप्त होती रहीं। प्रबंध तंत्र के अन्य अनुपस्थित महानुभावों ने भी स्थापना दिवस के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

संस्थान के निदेशक डॉ. शीतल चंद जी जैन ने अपने निदेशकीय वक्तव्य में संस्थान की विकास यात्रा में सहयोग देने वाले सभी महानुभावों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। वहीं उपप्राचार्य ने संस्थान के गौरवपूर्ण 30 वर्षीय इतिहास की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि तीन दशकों की यात्रा में संस्थान ने ज्ञान, संस्कार एवं श्रमण संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।

इस अवसर पर अनेक भामाशाह परिवारों ने संस्थान की विभिन्न योजनाओं से जुड़कर दान एवं पुण्यार्जन की घोषणाएं कीं। श्री मोहित जी राणा परिवार की ओर से भोजनशाला के नवीनीकरण के पुण्यार्जन हेतु घोषणा की गई, जबकि श्री विवेक जी काला परिवार की ओर से शिक्षक कक्षों के नवीनीकरण की घोषणा की गई। इन घोषणाओं से समारोह में उपस्थित समाजबंधुओं में विशेष उत्साह एवं आनंद का वातावरण रहा।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में संस्थान के मंत्री श्री सुरेश जी कासलीवाल ने आभार ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, भामाशाहों, पदाधिकारियों, विद्वानों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम का सफल संचालन संस्थान के प्राचार्य श्री सतीश कुमार जैन एवं उपप्राचार्य डॉ. किरणप्रकाश जी जैन ने किया। समारोह में संस्थान के विद्वान, व्याख्याता, स्टाफ, छात्र-छात्राएं, स्नातक परिवार, पदाधिकारी, भामाशाह एवं समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान परिवार ने संकल्प व्यक्त किया कि आने वाले समय में श्रमण संस्कृति, जिनवाणी, ज्ञान एवं संस्कारों की इस अमूल्य धरोहर को और अधिक व्यापक एवं विश्वव्यापी स्वरूप प्रदान करने के लिए निरंतर पुरुषार्थ किया जाएगा।

सतीश कुमार जैन
(प्राचार्य)
श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर

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