
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
योग को जीवन-साधना, समाजसेवा को उत्तरदायित्व और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनाने वाले योगाचार्य सुरेश पालीवाल को उनके बहुआयामी योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित गरिमामय समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
सुरेश पालीवाल की सामाजिक यात्रा केवल योग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने सुकृपा फाउंडेशन के माध्यम से सेवा और संवेदना के अनेक आयामों को स्पर्श किया है। समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव जागरूकता, कला और फोटोग्राफी जैसे क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उनके व्यक्तित्व को विशिष्ट पहचान दी है।
आरएसएमएम में उप प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी पालीवाल ने सक्रिय जीवन को ही अपनी प्राथमिकता बनाया। वे निरंतर सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़े रहे हैं। ‘सनातन पाठशाला’ के माध्यम से वे विभिन्न विद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कारों और जीवन मूल्यों पर आधारित सत्रों का संचालन करते हुए विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
उनकी इस उपलब्धि से मित्रों, सहयोगियों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर है। सभी ने इसे एक ऐसे साधक का सम्मान बताया, जिसने योग, सेवा और संस्कृति को अपने जीवन की त्रिवेणी बनाकर निरंतर समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया है।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


