
बागोर की हवेली में जलरंग कला प्रदर्शनी शुरू
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
इतिहास की सांसें समेटे बागोर की हवेली मंगलवार को रंग, रेखा और संवेदना के अनूठे संसार की साक्षी बनी। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर की कला वीथी में जलरंग माध्यम से सृजित चित्रों की विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ केन्द्र निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रदर्शनी में एक ही छत के नीचे गोवा की समुद्री जीवंतता और चित्तौड़गढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक चेतना को कलात्मक संवाद में पिरोया गया है।
इस अवसर पर डॉ. दलवी ने बताया कि प्रदर्शनी में गोवा एवं चित्तौड़गढ़ में आयोजित कला शिविरों के दौरान कलाकारों द्वारा जलरंगों में सृजित चुनिंदा कृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इन चित्रों में रंग केवल दृश्य नहीं रचते, बल्कि स्थान, समय और संस्कृति की अनुभूतियों को भी जीवंत करते हैं।
गोवा पर आधारित चित्रों में समुद्र तटों की खुली हवा, ऐतिहासिक गिरिजाघरों की स्थापत्य गरिमा, संकरी जीवंत गलियों की चहल-पहल और प्रकृति की हरित लय सहज आकर्षित करती है। वहीं चित्तौड़गढ़ की कृतियों में दुर्ग की विराटता, राजप्रासादों की भव्यता, मंदिरों की आध्यात्मिक आभा और वीरभूमि के इतिहास से उपजी गौरव चेतना प्रभावशाली रूप में उभरती है।
जलरंगों की सबसे बड़ी खूबी उनकी पारदर्शिता, कोमलता और प्रकाश के साथ बदलती अभिव्यक्ति है। कलाकारों ने इसी विशेषता को साधते हुए कहीं रंगों को धुंधली स्मृतियों की तरह बहने दिया है तो कहीं उन्हें स्थापत्य और प्रकृति की दृढ़ पहचान के रूप में उकेरा है।
यह प्रदर्शनी केवल चित्रों का अवलोकन नहीं, बल्कि दो अलग सांस्कृतिक भूगोलों की आत्मा से साक्षात्कार का अवसर प्रदान करती है। बागोर की हवेली की कला वीथी में सजी यह कलायात्रा दर्शकों को रंगों के माध्यम से विरासत, प्रकृति और इतिहास को नए भावबोध से देखने के लिए आमंत्रित करती है।
आमजन इस प्रदर्शनी का निःशुल्क अवलोकन कर सकते हैं। शुभारंभ अवसर पर केन्द्र के कई अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


