
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी अध्याय ‘काकोरी’ की स्मृतियां शुक्रवार को मंच पर जीवंत हुईं तो पूरा सभागार देशभक्ति के रंग में रंग गया। प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ एवं सभ्यता अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में काकोरी प्रतिशोध शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रस्तुत नाटक ‘काकोरी क्रांति गाथा’ ने दर्शकों को अमर क्रांतिकारियों के साहस और बलिदान से रूबरू कराया।
रवींद्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के न्यू ऑडिटोरियम में आयोजित प्रस्तुति में पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह सहित काकोरी कांड से जुड़े क्रांतिकारियों के संघर्ष को प्रभावी अभिनय, ओजपूर्ण संवादों और देशभक्ति गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों और आमजन से खचाखच भरे सभागार में कई प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंचन के दौरान ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से सभागार गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री हेमंत मीणा थे। विशिष्ट अतिथि पुलिस महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव एवं पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक अश्विन दलवी रहे, जबकि अध्यक्षता आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राहुल जैन ने की। माकड़ादेव धाम के गुरुजी गुलाबदास महाराज एवं अक्षय पात्र से अभय आत्मा श्रीकृष्ण दास गुरुजी का सान्निध्य भी मिला।
आयोजन में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. बी.पी. शर्मा, प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना, सभ्यता अध्ययन केंद्र राजस्थान चैप्टर के प्रभारी मनोज जोशी तथा निदेशक रविशंकर का सहयोग रहा।
नाटक ने नई पीढ़ी को संदेश दिया कि स्वतंत्रता के लिए किया गया बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना की अमिट प्रेरणा है।
रिपोर्ट/फोटो : यौवंतराज माहेश्वरी


