अशोकनगर। शाबाश इंडिया।

परम पूज्य आचार्य आर्जव सागर महाराज के शिष्य मुनि विशोध सागर जी महाराज ने बुधवार सायंकाल दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के लिए मंगल विहार किया। बगीचा मंदिर से प्रारंभ हुए पद विहार के दौरान जैन समाज के पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई दी। पार्श्वनाथ मंदिर पहुंचकर युगल मुनिराज ने वंदना की और इसके बाद आगे के लिए प्रस्थान किया।
विदाई अवसर पर जैन समाज के अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री शैलेंद्र श्रीवास्तव, संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इससे पूर्व आदीश्वर धाम, सुभाषगंज में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विशोध सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में परिश्रम करने वाले केवल शरीर को नहीं, बल्कि संयम के मार्ग पर चलने वाले अपने पूरे जीवन का इतिहास बदल देते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सद्गुणों का निरंतर अर्जन और अवगुणों का त्याग करना चाहिए। संसार में अधिकांश लोग दूसरों के दोष देखने के आदी हो जाते हैं, जबकि जीवन में गुणों को देखने की दृष्टि विकसित करना ही वास्तविक साधना है।
जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि अल्प प्रवास के बावजूद समाज को मुनि संघ का भरपूर सान्निध्य और मंगल प्रवचनों का लाभ मिला। उन्होंने कहा कि मुनि निरंजन सागर जी महाराज के दैनिक प्रवचनों, अभिषेक, शांतिधारा और महामंडल विधान जैसे धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं।
इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला, शांतिनगर की छात्राओं को मुनि संघ के सान्निध्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।
गंज मंदिर में विराजमान मुनि निरंजन सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संत सदैव सजग रहते हैं और दस प्रकार के दोषों से बचते हुए कठोर अनुशासन के साथ अपनी चर्या का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रमण प्रत्येक क्षण अपने कर्मों के प्रति सावधान रहते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।
मंगल विहार के दौरान थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन (टींगू मिल), संयोजक मनोज रन्नौद, विमल कुमार, शांतिनगर पाठशाला की छात्राएं तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पद विहार का लाभ प्राप्त किया। मुनि संघ का रात्रि विश्राम मनकापुर स्थित मनोज रन्नौद के शोरूम परिसर में निर्धारित किया गया।


