Tuesday, July 7, 2026

आगरा के छीपीटोला में धर्म और आस्था का ऐतिहासिक संगम, उपाध्याय पदारोहण व जैनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब

आगरा | शाबाश इंडिया।

पार्श्वधाम दिगम्बर जैन मंदिर, छीपीटोला में सोमवार को धर्म, आस्था और त्याग का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज एवं समस्त मुनिसंघ के मंगल सानिध्य में आयोजित उपाध्याय पदारोहण दिवस एवं भव्य जैनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

महोत्सव के दौरान निर्यापक मुनिश्री शिवदत्तसागर जी महाराज को उपाध्याय पद से विभूषित किया गया। वहीं, कोटा निवासी ब्रह्मचारी मोहनलाल भैया ने सांसारिक जीवन का त्याग कर मुनि दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा के उपरांत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने उन्हें मुनिश्री वासुदत्तसागर जी महाराज नाम प्रदान किया। एक ही मंच पर संपन्न हुए इन दोनों धार्मिक आयोजनों ने छीपीटोला को देशभर के जैन समाज के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना दिया।

प्रातःकाल जैन भवन से पार्श्वधाम छीपीटोला तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों, धार्मिक ध्वजों, भक्ति गीतों और जयघोषों के बीच निकली शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर आचार्यश्री ससंघ का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पूरा छीपीटोला धार्मिक उल्लास से सराबोर दिखाई दिया।

महोत्सव में ध्वजारोहण मनीष जैन, अनीष जैन एवं दीपक जैन (बोतल वाले परिवार) द्वारा किया गया। पंडाल का उद्घाटन हीरालाल बैनाड़ा एवं निर्मल मोठया परिवार ने किया, जबकि दीप प्रज्ज्वलन एवं चित्र अनावरण राहुल जैन और रवि जैन ने किया। छीपीटोला की बालिकाओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया तथा सौभाग्यवती महिलाओं ने पारंपरिक चौक पूरण की रस्म निभाई।

महोत्सव के दौरान फिरोजाबाद, अलीगढ़ और आगरा की जैन समाज की ओर से वर्ष 2026 के चातुर्मास एवं मंगल प्रवास के लिए आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल अर्पित कर विनय निवेदन किया गया।

आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने वैदिक एवं जैन परंपरा के मंत्रोच्चार के मध्य निर्यापक मुनिश्री शिवदत्तसागर जी महाराज के मस्तक पर साथिया अंकित कर उन्हें उपाध्याय पद के संस्कार प्रदान किए। उपाध्याय पद ग्रहण करते ही पूरा पंडाल जयघोषों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने खड़े होकर भावभीनी वंदना की।

इसके बाद समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब ब्रह्मचारी मोहनलाल भैया ने मुनि दीक्षा ग्रहण की। आचार्यश्री ने अपने करकमलों से उनका केशलोंच कर मुनि दीक्षा के संस्कार प्रदान किए और उन्हें मुनिश्री वासुदत्तसागर जी महाराज नाम से विभूषित किया। दीक्षा के उपरांत परिजनों ने नवीन कमंडल एवं पिच्छी भेंट कर भावभीनी विदाई दी। इस दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

अपने मंगल प्रवचनों में संतों ने धर्म, संयम, संस्कार और आत्मकल्याण का संदेश देते हुए समाज को सदाचार, सेवा और आध्यात्मिक जीवन अपनाने का आह्वान किया।

आगरा, फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, इटावा, बरहन, जलेसर, कोटा, दिल्ली, सागर, अशोकनगर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति से पूरा पार्श्वधाम परिसर श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंदिर समिति, महोत्सव समिति एवं युवा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं, समाजबंधुओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उपाध्याय पदारोहण एवं जैनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव धर्म, त्याग, तप, संस्कार और सामाजिक एकता का अविस्मरणीय पर्व बन गया।

महोत्सव का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया।

इस अवसर पर प्रदीप जैन (पीएनसी), जगदीश प्रसाद जैन, राकेश जैन, अनंत जैन, जितेंद्र जैन, आशोक जैन, राजेश जैन, नीरज जैन, अमित जैन, मनोज जैन बल्लो, मुरारीलाल जैन, अनिल जैन फौजी, प्रवीन जैन नेता, भुवनेश जैन, दीपक जैन, मोनू जैन, आयुष जैन, बिट्टू जैन, सत्येंद्र जैन, सचिन जैन, संजीव जैन, अतिशय जैन, हेमंत जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, एनसीसी क्लब छीपीटोला के सदस्य तथा बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: शुभम जैन

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